27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सुप्रीम कोर्ट में आज पेश होंगे भाजपा नेता मनोज तिवारी, सीलिंग तोड़ने के मामले में देंगे सफाई

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने 16 सितंबर को अपने संसदीय क्षेत्र के गोकुलपुर गांव के एक मकान की सीलिंग तोड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमिटी ने जताई थी नाराजगी।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

नई दिल्ली

•

image

Dhirendra Kumar Mishra

•

Updated: 25 Sep 2018, 9:45 AM IST

manoj tiwari

सुप्रीम कोर्ट में आज पेश होंगे भाजपा नेता मनोज तिवारी, सीलिंग तोड़ने के मामले में देंगे सफाई

नई दिल्ली। एक मकान में नगर निगम द्वारा लगाए गए सीलिंग को तोड़ने को मामले में आज दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगे। बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी ने 16 सितंबर को अपने संसदीय क्षेत्र के गोकुलपुर गांव के एक मकान की सीलिंग तोड़ी थी। इस मामले में उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। अगर यह मामला उनके खिलाफ गया तो उन्‍हें अवमानना का दोषी माना जा सकता है।

अदालत की अवमानना का मामला
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमिटी ने शीर्ष अदालत में इस बात की शिकायत की थी। इस मामले में कोर्ट ने मनोज तिवारी पर नाराजगी जाहिर की थी। साथ ही कहा था कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि चुने हुए जनप्रतिनिधि ही सीलिंग तोड़ रहे हैं। कोर्ट ने मनोज तिवारी को अदालत की अवमानना का नोटिस जारी करते हुए मंगलवार 25 सितंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था।

सीलिंग लगाना सही नहीं
इस मामले में भाजपा सांसद मनोज तिवारी का कहना है कि जिस मकान की सीलिंग उन्होंने तोड़ी उसमें सीलिंग लगाना सही नहीं था। सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमिटी की आड़ में एमसीडी के अधिकारी पिक एंड चूज कर रहे हैं और दिल्ली की जनता को परेशान कर रहे हैं। एक चुने हुए जनप्रतिनिधि और सांसद होने के नाते उनका यह कर्तव्य है कि वह कानून की रक्षा करें।

कमिटी के अधिकार क्षेत्र से बाहर
बताया यह जा रहा है कि मनोज तिवारी सुप्रीम कोर्ट को यह भी कह सकते हैं कि गोकुलपुर के जिस मकान की सीलिंग उन्होंने तोड़ी वह मॉनिटरिंग कमिटी के दायरे में आता ही नहीं। जिस मकान की सीलिंग तोड़ने की बात है वो मकान पूर्वी दिल्ली नगर निगम पशु पालन विभाग के दायरे में आता है। पशुपालन विभाग ने गलत सूचना के आधार पर इसे सील किया था। विभाग के अधिकारियों को जानकारी मिली थी कि मकान के अंदर डेयरी चल रही है। जबकि दिल्ली के गांव में पांच पशु यानी गाय या भैंस रखने की इजाजत दी जा सकती है। फिर जिस मकान की सीलिंग तोड़ी गई उसमें केवल दो भैंसें थीं।

बड़ी खबरें

View All

विविध भारत

ट्रेंडिंग