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क्‍या आजादी के बाद भारत में घटी हिंदुओं की आबादी?

हिंदुओं की तुलना में मुस्लिमों की आबादी औसतन ज्‍यादा बढ़ी मुस्लिम महिलाओं में प्रजनन दर हिंदुओं से बेहतर CAB पर जोर से सियासी चर्चा के केंद्र में हिंदू-मुस्लिम आबादी

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नई दिल्‍ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राज्‍यसभा में नागरिकता संशोधन बिल 2019 पेश करेंगे। लोकसभा में यह बिल दो दिन पहले पास हो चुका है। इसके साथ ही एक बार फिर हिंदुओं और मुस्लिमों की आबादी को लेकर भी राजनीति चरम पर है। राजनीति के केंद्र में हिंदुओं की आबादी कम होना और मुस्लिमों की आबादी बढ़ना है।

दरअसल, 2011 की जनगणना के धार्मिक आंकड़ों के मुताबिक भारत में हिंदुओं की आबादी में कमी आई है। जबकि मुस्लिमों की आबादी में औसतन इजाफा हुआ है। हालांकि मुस्लिमों आबादी में जन्‍म दर गिरावट दर्ज हुई है।

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भारत में जनसंख्या की कहानी

जनगणना के धर्म आधारित आंकड़ों के मुताबिक 2001 से 2011 के बीच हिंदू आबादी 16.76 फीसदी की तेजी से और मुस्लिम आबादी 24.6 फीसदी की तेजी से बढ़ी। इससे पिछले दशक में हिंदुओं की आबादी 19.92 फीसदी की तेजी से और मुस्लिमों की आबादी 29.52 फीसदी की तेजी से बढ़ी थी।

इन आंकड़ों से साफ है कि मुस्लिमों की आबादी बढ़ने की दर हिंदुओं से तेज है, पर दोनों धर्मों की आबादी की वृद्धि दर का अंतर तेजी से कम हो रहा है।

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जनगणना 2011 के मुताबिक भारत में 96.63 करोड़ हिंदू हैं जो कुल आबादी का 79.8 फीसदी बैठते हैं। कुल जनसंख्या में मुस्लिमों आबादी 14.23 फीसदी है। इनकी आबादी 17.22 करोड़ है। दूसरे अल्पसंख्यकों में ईसाई धर्म की आबादी का प्रतिशत 2.3 फीसदी और सिख धर्म की आबादी का प्रतिशत 2.16 फीसदी है।

2050 तक हो जाएगी दोनों की प्रजनन क्षमता बराबर

आजादी के बाद से मुस्लिमों की जनसंख्या वृद्धि दर हिंदुओं के मुकाबले तेज रही है। इसकी वजह मुस्लिमों में उच्च प्रजनन क्षमता, हिंदुओं में बाल मृत्यु दर अधिक होना और मुस्लिमों की औसत उम्र ज्यादा होना रहा है।

हाल ही में प्यू रिसर्च की फ्यूचर ऑफ वर्ल्ड रिलीजन रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में अब मुस्लिमों की प्रजनन क्षमता हिंदुओं के मुकाबले तेजी से कम हो रही है और 2050 तक दोनों की प्रजनन क्षमता बराबर हो जाएगी।

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बता दें कि मुस्लिमों में जन्‍मदर अनुपात पहले ही हिंदुओं से बेहतर था, अब यह और बेहतर हो रहा है। मुस्लिमों में 2001 में 1,000 पुरुषों के मुकाबले 936 महिलाएं थीं जो बढ़कर 951 हो गई हैं। वहीं हिंदुओं में 2001 में 1,000 के मुकाबले 931 महिलाएं थीं जिसमें थोड़ा सा सुधार हुआ है और अब यह 939 है।

इसी तरह 1951 से 2011 तक हिंदू-मुस्लिम आबादी की बात करें तो संख्‍या और औसत दोनों में मुस्लिमों की आबादी में तुलनात्‍मक रूप से ज्‍यादा इजाफा हुआ है।

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1951 की जनगणना में हिंदुओं की आबादी 84.1% और मुस्लिमों की 9.8%, 1961 में हिंदुओं की 83.4 % तो मुस्लिमों की 10.4%, 1971 में हिंदू आबादी 82.7% और मुस्लिमों की 11.2%, 1981 में हिंदू आबादी 82.6% तो मुस्लिमों की 11.4%, 1991 में हिंदुओ की आबादी में 81.6% और मुस्लिमों की 12.6%, 2001 में हिंदुओं की आबादी 80.5% तो मुस्लिमों की आबादी 13.4% और अब 2011 की जनगणना के मुताबिक हिंदुओं की आबादी 79.8% है तो मुस्लिमों की आबादी बढ़कर भारत के कुल आबादी को 14.23% हो गया है।

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तय है कि आजादी के बाद से लेकर अब तक के आंकड़े यही बताते हैं कि हिंदुओं की औसत आबादी दर घटी है जबकि मुस्लिमों की आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है।