
Jammu and Kashmir: इतिहास में पहली बार में Martyrs Day नहीं मनेगा, जानें वजह
नई दिल्ली। पांच अगस्त 2019 को लागू पुनर्गठन अधिनियम का असर नजर आने लगा है। यही वजह है कि 1948 के बाद पहली बार, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर ( union territory of Jammu and Kashmir ) में शहीद दिवस ( Martyrs Day ) मनाने के लिए न तो कोई अवकाश रखा जाएगा और न ही कोई आधिकारिक कार्य रखे जाएंगे।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार “पिछले साल दिसंबर में, राजपत्रित छुट्टियों की सूची में 13 जुलाई और 5 दिसंबर को पूर्व जम्मू-कश्मीर के प्रधान मंत्री शेख मुहम्मद अब्दुल्ला ( J&K Prime Minister Sheikh Muhammad Abdullah) की जयंती पर शहीद दिवस का कोई उल्लेख नहीं था। इसलिए, सवाल यह नहीं है कि कोई आधिकारिक समारोह आयोजित किया जाए या सोमवार को अवकाश घोषित किया जाए।
आपको बता दें कि पिछले साल 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के बाद, सरकार ने नए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के लिए गजट छुट्टियों की सूची जारी की थी। हालांकि, 13 जुलाई और 5 दिसंबर को कश्मीर केंद्रित दलों द्वारा नाराजगी जताने वाली सूची से हटा दिया गया था।
जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन प्रधान मंत्री, शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने 13 जुलाई, 1931 को डोगरा शासन के खिलाफ विद्रोह करने वालों की याद में 13 जुलाई को शहीद दिवस घोषित किया था। तत्कालीन डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह के विरोध प्रदर्शन में 22 लोग मारे गए थे।
Updated on:
12 Jul 2020 10:50 pm
Published on:
12 Jul 2020 09:28 pm
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