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जस्टिस रंजन गोगोई को अगला CJI बनाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, नियुक्ति रद्द करने की मांग

प्रधान न्यायाधीश मिश्रा के खिलाफ इस वर्ष के प्रारंभ में बगावत कर चुके चार न्यायाधीशों में शामिल रहे जस्टिस गोगोई को 3 अक्टूबर को भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे।
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नई दिल्ली

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Chandra Prakash Chourasia

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Updated: 25 Sep 2018, 10:45 PM IST

Justice Ranjan Gogoi

जस्टिस रंजन गोगोई को CJI बनाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, नियुक्ति रद्द करने की मांग

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट भावी प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई पर विवाद शुरू हो गया है। वकील लूथरा ने याचिकाकर्ता वकील सत्यवीर शर्मा के साथ मिलकर न्यायमूर्ति गोगोई की प्रधान न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग की। जिसपर सुनवाई के लिए कोर्ट तैयार हो गया है। याचिका का आधार 12 जनवरी को घटी उस घटना को बनाया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट चार वरिष्ठ न्यायाधीशों की तरफ से पहली बार संवाददाता सम्मेलन बुलाया गया था। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस गोगोई भी शामिल थे। जिसके बाद देश में पहली बार न्यायिक संकट खड़ा हो गया।

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बुधवार को होगी पहली बार सुनवाई

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हुई और बुधवार को पहली सुनाई की जाएगी। सीजेआई दीपक मिश्रा, जस्टिस ए.एम. खानविलकर और जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने वकील आर.पी. लूथरा से कोर्ट मास्टर के समक्ष मेंसनिंग मेमो दाखिल करने के लिए कहा है। एडवोकेट लूथरा ने इस मामले को पीठ के सामने जल्द सुनवाई के लिए पेश किया था।

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3 अक्टूबर को शपथ लेने वाले हैं न्यायमूर्ति गोगोई

प्रधान न्यायाधीश मिश्रा के खिलाफ इस वर्ष के प्रारंभ में बगावत कर चुके चार न्यायाधीशों में शामिल रहे जस्टिस गोगोई को 13 सितंबर को भारत का अगला प्रधान न्यायाधीश नियुक्ति किया गया। मौजूदा प्रधान न्यायाधीश मिश्रा दो अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वकील लूथरा ने याचिकाकर्ता वकील सत्यवीर शर्मा के साथ मिलकर न्यायमूर्ति गोगोई की प्रधान न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति रद्द करने की मांग की। गोगोई 3 अक्टूबर को कार्यभार संभालने वाले हैं।

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याचिका में उठाई गई मांग

याचिका में कानून के प्रश्न का निर्णय करने की मांग की गई है, जिसके लिए वे चार वरिष्ठ न्यायाधीशों की तरफ 12 जनवरी को बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन की सामग्री पर निर्भर हैं, जिसमें न्यायमूर्ति गोगोई भी शामिल थे। याचिका में कहा गया है, कि अदालत के सर्वाधिक वरिष्ठ चार न्यायाधीशों का यह कदम देश की न्याय प्रणाली को नष्ट करने से कम नहीं था। उन्होंने इस अदालत में खास आंतरिक मतभेदों के नाम पर देश में सार्वजनिक हंगामा खड़ा करने की कोशिश की। उन्होंने कहा है कि न्यायमूर्ति गोगोई को उनके अवैध और संस्थान विरोधी कदम के लिए झिड़की दी जानी चाहिए थी।

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12 जनवरी को भारत में खड़ा हुआ न्यायिक संकट

बता दें कि 12 जनवरी,2018 को आजाद भारत में पहली बार सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने मीडिया से एक साथ बात की। जिसमें न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर और न्यायमूर्ति चेलमेश्वर शामिल थे। इन्होंने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर मामलों को उचित पीठ को देने के नियम का सख्ती से पालन नहीं करने का आरोप लगाया। न्यायाधीशों ने कहा कि इससे सर्वोच्च न्यायालय की ईमानदारी पर संदेह पैदा हो सकता है। न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर के आवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए न्यायाधीशों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है और उन्होंने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को लिखे बिना तिथि वाले एक पत्र जारी किया जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधान न्यायाधीश सर्वेसर्वा (मॉस्टर ऑफ रॉस्टर) हैं, लेकिन यह कि प्रधान न्यायाधीश के उनके सहकर्मियों पर कानूनी या तथ्यात्मक रूप से किसी अधिकार को मान्यता नहीं है।