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जस्टिस रंजन गोगोई के अगले CJI नियुक्ति के खिलाफ याचिका खारिज, SC बोला- आरोप में दम नहीं

एकवोकेट लूथरा ने कहा कि 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों ने संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें न्यायमूर्ति गोगोई ने प्रधान न्यायाधीश मिश्रा के खिलाफ एक तरह से विद्रोह किया था।
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Chandra Prakash Chourasia

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Updated: 26 Sep 2018, 9:41 PM IST

Justice Ranjan gogoi

जस्टिस रंजन गोगोई के अगले CJI नियुक्ति के खिलाफ याचिका खारिज, SC बोला- आरोप में दम नहीं

नई दिल्ली। देश के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। बुधवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा,जस्टिस ए.एम.खानविलकर और जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि इस मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप की कोई जरुरत नहीं है और याचिका को 'बिना किसी महत्व का' बताकर खारिज कर दिया।

हस्तक्षेप के लायक मामला : कोर्ट

याचिकाकर्ता वकील आर.पी. लूथरा ने कहा कि उन्हें बहस करने की अनुमति दिए बिना ही उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया। 3 सदस्यों की पीठ ने कहा कि हमने पाया कि यह ऐसा मामला नहीं है जिसमें हस्तक्षेप किया जाए। हम इसमें कोई योग्यता नहीं देखते हैं।

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जस्टिस गोगोई को फटकारने की थी मांग

एकवोकेट लूथरा ने कहा कि 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों ने संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया था, जिसमें न्यायमूर्ति गोगोई ने प्रधान न्यायाधीश मिश्रा के खिलाफ एक तरह से विद्रोह किया था। उन्होंने कहा कि यह न्यायिक प्रणाली को नुकसान पहुंचाने का प्रयास था और न्यायमूर्ति गोगोई को उनके 'अवैध और असंवैधानिक कार्य' के लिए फटकारा (रेप्रीमैंडेड) जाना चाहिए।

3 अक्टूबर को शपथ लेने वाले हैं न्यायमूर्ति गोगोई

जस्टिस गोगोई को 13 सितंबर को भारत का अगला प्रधान न्यायाधीश नामित किया गया। मौजूदा प्रधान न्यायाधीश मिश्रा दो अक्टूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। जस्टिस गोगोई 3 अक्टूबर को कार्यभार संभालने वाले हैं।

12 जनवरी को भारत में खड़ा हुआ न्यायिक संकट

बता दें कि 12 जनवरी,2018 को आजाद भारत में पहली बार सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों ने मीडिया से एक साथ बात की। जिसमें न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर और न्यायमूर्ति चेलमेश्वर शामिल थे। इन्होंने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर मामलों को उचित पीठ को देने के नियम का सख्ती से पालन नहीं करने का आरोप लगाया। न्यायाधीशों ने कहा कि इससे सर्वोच्च न्यायालय की ईमानदारी पर संदेह पैदा हो सकता है। न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर के आवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए न्यायाधीशों ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है और उन्होंने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को लिखे बिना तिथि वाले एक पत्र जारी किया जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधान न्यायाधीश सर्वेसर्वा (मॉस्टर ऑफ रॉस्टर) हैं, लेकिन यह कि प्रधान न्यायाधीश के उनके सहकर्मियों पर कानूनी या तथ्यात्मक रूप से किसी अधिकार को मान्यता नहीं है।