शन्मुगा ने क्यों नासा को बताई चंद्रमा पर विक्रम लैंडर के मलबे की लोकेशन

  • 7 सितंबर को लैंडिंग से पहले टूट गया था विक्रम लैंडर का संपर्क।
  • तब से इसरो, नासा समेत कई एजेंसियों ने इसे ढूंढने के प्रयास किए।
  • नासा जो नहीं कर सका, उसे पूरा कर शन्मुगा ने रोशन किया देश का नाम।

 

नई दिल्ली। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेश (इसरो) के महात्वाकांक्षी अभियान चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर के मलबे को ढूंढकर एक भारतीय शन्मुगा सुब्रमण्यम ने कमाल कर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। हालांकि शन्मुगा की माने तो यह काम आसान नहीं था क्योंकि नासा इसे नहीं कर सका था और उन्होंने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया।

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शन्मुगा सुब्रमण्यम ने एक ईमेल में कहा, "यह कुछ चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि नासा भी यह पता नहीं लगा सका था। फिर हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते? और यही वह सोच है जिसने मुझे विक्रम लैंडर की खोज करने के लिए प्रेरित किया।"

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33 वर्षीय सुब्रमण्यन एक मैकेनिकल इंजीनियर हैं और एक मल्टीनेशनल कंपनी में आईटी सेक्टर में काम करते हैं। उन्होंने अपने खाली समय में 17 सितंबर को नासा के लूनर रेकॉन्सेन्स ऑर्बिटर (एलआरओ) कैमरे द्वारा ली गई तस्वीरों को देखा जिसमें उन्हें विक्रम का मलबा दिखाई दिया।

जब लैंडर से संपर्क टूटा था उस समय नासा और एलआरओ ने कहा था कि बड़ी परछाई होने के कारण और लैंडर की जगह पर उचित रोशनी नहीं होने के कारण उसे खोजना मुश्किल काम है।

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एलआरओ प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक नोआ पेट्रो, जिनसे सुब्रमण्यन ने अपनी खोज का ईमेल किया, ने बताया, "इस अद्भुत व्यक्ति की कहानी वाकई शानदार है, जिसने हमें इसे खोजने में मदद की। यह वास्तव में बहुत बढ़िया है।"

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चंद्रमा की सतह की खोज करने की उम्मीद में विक्रम को चंद्रयान से 7 सितंबर को चांद की एक सुरक्षित जगह पर उतरने के लिए भेजा गया। हालांकि सतह पर उतरने से कुछ दूरी पहले ही लैंडर से संपर्क टूट गया और इसकी वजह हार्ड लैंडिंग थी।

पेट्रो ने कहा, "यह हमारे डेटा के बारे में अद्भुत बात है। हमने इसे दुनिया के लिए जारी किया और कोई भी इसका उपयोग कर सकता है और उसने इसका इस्तेमाल अपनी खोज के लिए किया।"

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सुब्रमण्यन ने बताया, "मैं छात्रों और अन्य लोगों को सुझाव दूंगा कि वे नासा, इसरो और अन्य अंतरिक्ष संगठनों को एलआरओ तस्वीरों के अच्छे डेटाबेस का निर्माण करने में मदद करें।"

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अमित कुमार बाजपेयी
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