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अटल बिहारी वाजपेयी देहरादून जब आते थे तो इसी स्कूटर पर घूमते थे, जानिए क्या है खासियत

अटलजी जब भी देहरादून जाते थे तो अपने दोस्त की स्कूटर लेकर शहर में घूमा करते थे।

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अटल बिहारी वाजपेयी देहरादून जब आते थे तो इसी स्कूटर पर घूमते थे, जानिए क्या है खासियत

देहरादून: देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी भले ही अब दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उनकी यादें हमेशा-हमेशा लोगों के जेहन में बसी रहेंगी। अटलजी राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय होने के चलते देश भर में घुमा करते थे। इसी क्रम में वो देहरादून भी जाया करते थे। अटलजी जब भी वहां जाते तो अपने दोस्त की स्कूटर लेकर शहर में घूमा करते थे। 1964 मॉडल की एक नीले रंग की स्कूटर उनके करीबी सहयोगी और भाजपा नेता नरेंद्र स्वरूप मित्तल की थी। इसी नीले रंग की स्कूटर से शहर में कार्यकर्ताओं से मिलने निकलते थे। हालांकि नरेंद्र स्वरूप का 2015 में निधन हो गया। लेकिन उनके बेटे पुनीत मित्तल अब भी स्कूटर को सहेजकर रखे हुए हैं। 54 सालों से स्कूटर को बड़े ही करीने तरीके से रखा गया है। इतना ही नहीं कई बार वह पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित के घर पर भी इसी स्कूटर से मिलने जाते थे। उनकी 1 दिसंबर 1990 को निधन हो गई थी। विजय लक्ष्मी पंडित तब राजपुर रोड पर रहती थीं।

स्कूटर से पंडित नेहरू की बहन के घर जाते थे अटल जी

पुनीत के मुताबिक जब भी अटलजी देहरादून आते थे तो शहर में कार्यकर्ताओं से मिलने के लिए इसी स्कूटर का इस्तेमाल करते थे। यहां तक की जवाहर लाल नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित के आवास उनसे मिलने इसी स्कूटर से जरूर जाते थे। भले ही वह वहां पांच मिनट ही रुकते थे लेकिन उनके घर जाते जरूर थे।' पुनीत ने बताया कि उनके पिता नरेंद्र स्वरूप मित्तल की 84 वर्ष की उम्र में 2015 में मृत्यु हो गई थी। वह वाजपेयी को अपना मार्गदर्शक मानते थे।

अटल जी जैसा कोई नहीं

पुनीत ने बताया, 1993 में अटलजी पुनीत की शादी में शामिल होने देहरादून आए थे। पुनीत ने बताया, 'वह मेरी शादी में चार घंटे रुके थे और जाने से पहले उन्होंने मुझसे इजाजत भी ली थी। उन्होंने मुझसे कहा था कि शादी में दूल्हे का महत्व होता है इसलिए शादी समारोह छोड़ने से पहले दूल्हे की अनुमति लेनी जरूरी है। पुनीत ने कहा कि अटल जी जैसा नेता बनना आसान नहीं है। आज के दौर में उनके जैसा कोई नहीं बन सकता है।

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