
बांग्लादेश युद्ध: कैसे खत्म हुआ निक्सन, किसिंजर और याह्या खान का खेल, अकेली डटी रहीं इंदिरा गांधी
नई दिल्ली। चालीस साल पहले 16 दिसंबर, 1971 को बांग्लादेश युद्ध समाप्त हो गया था। भारत ने इस युद्ध में पाकिस्तान पर निर्णायक जीत हासिल की और पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा बांग्लादेश के नाम से एक अलग देश बन गया। यूं तो इस लड़ाई को खत्म हुए सालों बीत गए लेकिन अब भी इसके बारे में नए-नए रहस्य सामने आ रहे हैं। इस युद्ध में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कौशल और उनकी नेतृत्व क्षमता की जितनी तारीफ की जाए, कम है। माना जाता है कि इस लड़ाई में इंदिरा गांधी को अकेले पाकिस्तान के जनरल याह्या खान से ही नहीं बल्कि अमरीकी राष्ट्रपति निक्सन और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर से एक साथ निपटना पड़ा। यह युद्ध आकार में छोटा और क्रूरता में बेहद गंभीर था। केवल 13 दिन की लड़ाई ने भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास और भूगोल दोनों को बदल दिया। इसने इंदिरा गांधी को एशिया की आयरन लेडी के रूप में प्रतिष्ठित किया।
अमरीका से मिली बड़ी चुनौती
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गैरी जे बास ने अपनी पुस्तक 'द ब्लड टेलीग्राम' में खुलासा किया है कि अमरीकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर ने इस युद्ध में हत्यारों के साथ सहयोग किया था । इस मामले में अमरीकी सहानुभूति पूर्वी पाकिस्तान में निर्दोष लोगों का संहार करने वाली पाकिस्तानी सरकार के साथ थी। अब इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि निक्सन और किसिंजर अपने नैतिक अंधेपन की पराकष्ठा पर पहुंच चुके थे। उन्होंने भारत और भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अपार नफरत करनी शुरू कर दी। 25 मार्च, 1971 की रात को जब पाकिस्तान सेना ने बंगालियों पर कार्रवाई शुरू की, तब पूर्वी पाकिस्तान में कई हजार लोगों को मार डाला गया। उसके बाद जब भारत की कार्रवाई शुरू हुई तो वाशिंगटन में राष्ट्रपति रिचर्ड एम निक्सन और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हेनरी किसिंजर भड़क उठे।
अपशब्दों का प्रयोग
निक्सन भारत की पीएम इंदिरा गांधी पर बुरी तरह नाराज थे। उन्होंने इस मुद्दे पर भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का समर्थन करने से इंकार कर दिया और सार्वजनिक रूप से भारतीय प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द कहे। यही नहीं तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने भारत के खिलाफ अपना जंगी जहाजी बेड़ा बंगाल की खाड़ी में भेजने का एलान किया। भारत को उकसाने के प्रयास में हिंद महासागर में अमरीका का सांतवा बेड़ा देखा गया।दुनिया के दो सबसे शक्तिशाली पुरुषों, किसिंजर और राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन द्वारा उपयोग की जाने वाली भाषा से इंदिरा गांधी बेहद दुखी हुईं लेकिन उन्होंने जल्द ही इस अपशब्द का जवाब अपने कामों से दिया। कांग्रेस पार्टी के मजबूत विरोध प्रदर्शन के बाद किसिंजर ने एक भारतीय टेलीविजन नेटवर्क पर माफी मांगी। उन्होंने कहा "मुझे खेद है कि इन शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। श्रीमती गांधी के लिए राजनेता के रूप में मेरा बहुत सम्मान है।"
इंदिरा गांधी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण समय
यह समय भारत की पीएम इंदिरा गांधी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। अमरीका भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर आमादा था। यह संयुक्त राज्य अमरीका और भारत दोनों के लिए एक निश्चित क्षण था। लेकिन इंदिरा गांधी ने हिम्मत नहीं हारी, और अमरीका के दवाब को निष्प्रभावी बनाने के लिए अपनी कूटनीतिक कुशलता का सहारा लिया। उन्होंने एक तरफ तो रुसे राष्ट्रपति को अपना संदेश भेजा तो दूसरी तरफ बांग्लादेशी नेता शेख मुजीबुर्रहमान को संयुक्त राष्ट्र में अपील करने को कहा। बाद में इंदिरा गांधी की कोशिशें रंग ले आईं , और अमरीका के राष्ट्रपति निक्सन को इस युद्ध में पाकिस्तान का साथ देने के लिए कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। यह अमेरिकी विदेश नीति के सबसे बुरे क्षणों में से एक माना जाता है। अब यह तथ्य साबित हो चुका है कि 1971 के बांग्लादेश संकट के दौरान भारत के खिलाफ निक्सन और किसिंजर ने लगभग व्यक्तिगत स्तर पर युद्ध किया था ।
Updated on:
19 Nov 2018, 11:33 AM IST
Published on:
19 Nov 2018, 11:24 AM IST
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