31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मुसलमान विरोधी बयान पर पोम्पियो के अमरीकी विदेश मंत्री के रूप में नामांकन का हो रहा है विरोध

अमरीका के रिपब्लिकन सिनेटर माइक पोम्पियों ने अप्‍लसंख्‍यकों के खिलाफ दिए गए बयानों को वापस लेने से इनकार किया।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

•

image

Dhirendra Kumar Mishra

•

Updated: 26 Apr 2018, 1:46 PM IST

mike

नई दिल्‍ली। रिपब्लिकन सिनेटर माइक पोम्पियो को बतौर अमरीकी विदेश मंत्री नियुक्‍त होने से पहले ही सिनेट में उनके नामांकन का विरोध शुरू हो गया है। विरोध करने वाले सिनेटर्स का कहना है कि पहले वो मुस्लिमों के खिलाफ अपना बयान वापस लें। उनके नामांकन का विरोध मुख्‍य रूप से डेमोक्रेट्स सिनेटर्स कर रहे हैं। विरोध की वजह से उनके नामांकन का मुद्दा अधर में लटक गया है। आपको बता दें के उनके नामांकन को सिनेट से मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया जारी है। विरोध की वजह से इसमें विलंब हो सकता है।

बयान नामांकन को खारिज करने का अधिकार नहीं
हालांकि सिनेट में पोम्पियो के नामांकन पर चल रही बहस के दौरान सदन की विदेश मामलों की समिति के टॉप सदस्‍य रॉबर्ट मेनेनडेज ने कहा कि ये चिंताएं नीतिगत मतभेदों से इतर हैं लेकिन केवल यह नामांकन को खारिज किए जाने का आधार नहीं है। सेनेट में अल्पसंख्यक नेता चार्ल्स शूमर ने कहा कि उन्होंने पोम्पिओ से पूछा कि अगर वह मुसलमानों और भारतीय अमेरिकियों, एलजीबीटीक्यू अमेरिकियों और महिला अधिकारों के बारे में कही गई बात अस्वीकार करेंगे तो वह उन्‍हें अमरीकी विदेश मंत्री बनाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा पनी टिप्पणियों से प्रभावित होने वाले देशों से भी निपटना होगा। लेकिन शूमर के इस अपील को पोम्पियो ने खाजिर कर दिया है। इस पर अल्‍पसंख्‍यक नेता ने कहा कि ऐसी स्थिति में खुलकर उनके नामांकन का विरोध करेंगे।

पगड़ी को केवल मुसलमान से जोड़ना गलत
शूमर ने कहा कि मेरा अब भी मानना है कि राष्ट्रपति को उनकी टीम मिलनी चाहिए और केवल नीति पर असहमतियां किसी नामांकन को खारिज करने की पर्याप्त वजह नहीं हैं। टॉप डेमोक्रैट सेनेटर रॉबर्ट मेनेनडेज ने भी इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि वह पगड़ी पहनने वाले अलग-अलग धर्मों के असंख्य लोगों के बारे में इस तरह के बयान को कैसे स्पष्ट करेंगे। चाहे ये लोग महत्वपूर्ण सहयोगी देश भारत में रहने वाले लाखों सिख या मुसलमान हों या अफ्रीका के रूढ़िवादी ईसाई या अफगानिस्तान में जनजातीय नेता जिनके साथ हम लोकतंत्र और मानव अधिकारों के मूल्यों पर आधारित रचनात्मक संबंध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। मेनेनडेज ने कहा कि उनके आरोपों का असर यह पड़ेगा कि उन्हें दुनियाभर के मुसलमान नेताओं और नागरिकों से बातचीत करनी पड़ेगी। आपको बता दें कि दुनिया में करीब 2 अरब लोग इस्लाम में विश्वास रखते हैं इनमें से कई उन देशों के लोग हैं जिनके साथ अमेरिका के संबंध महत्वपूर्ण हैं।