
नई दिल्ली। टेक्सास के ओडेम शहर की रहने वाली 20 साल जिलीयन विलियम्स एक सुंदर, प्रतिभाशाली और बुद्धिमान युवा महिला जो मिस युवा यूएसए सुंदरी प्रतियोगिता हिस्सा लेकर सबके आमने ऐसे आई के सब इनको सलाम कर थकते नहीं हैं। इतना ही नहीं साथ ही वे एक प्रतिभाशाली वॉलीबॉल खिलाड़ी भी हैं। दुर्भाग्य से, अचानक एक दिन उनकी पूरी दुनिया बिखर गई जब उन्हें इविंग साराकोमा में होने का पता चला आपको बता दें ये एक दुर्लभ किस्म का हड्डी का कैंसर है।
सितम्बर 2015 में टेक्सास लुथेरन यूनिवर्सिटी में वॉलीबॉल मैच के दौरान जिलीयन के घुटने में बहुत तेज दर्द हुआ लेकिन उन्होंने इसे हड्डियों को मांसपेशीयों से जोड़ने वाली सूजन समझकर इसपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि, ' ऐसा होने पर मेरे कोच ने कहा आप तकनीकी रूप से अभी भी खेल सकती हैं जब तक कि दर्द ज्यादा ना बढ़ जाए। इसीलिए मैंने पूरा सीजन खेला और तय किया कि सीजन खत्म होने के बाद डॉक्टर के पास सर्जरी के लिए जाउंगी।'
इसके बाद खेल खत्म होने पर जिलीयन पैर की जांच करवाने हड्डी विशेषज्ञ के पास गई, ताकि वो ठीक हो सकें। एमआरआई से पता चला कि उनके पैर की जांघ की हड्डी में फ्रैक्चर है और उसमें अल्सर हो गया है। इससे भी दुःख की बात ये थी कि उनका अल्सर तेजी से बढ़ रहा था। जिलीयन ने आगे कहा, 'इसकी हालत यह दो महीनों में ढाई सेंटीमीटर बढ़ गया। हम ऑन्कोलॉजिस्ट के पास गए जिन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि यह सिर्फ एक संक्रमण है लेकिन मैं इसके बारे में निश्चित होने के लिए बायोप्सी करना जरुरु होगा।'
फिर उन्होंने बताया, 'उन्होंने मेरी ओपन बायोप्सी की और जब रिपोर्ट आई तो ईविंग सरकोमा के होने का पता चला। जब उन्होंने मुझे बताया कि मुझे कैंसर है तो मैं चौंक गई, मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा था मुझे लग रहा था मेरी दुनिया ही खत्म हो गई है। जिलीयन ने आगे कहा, 'मेरे पास दो विकल्प थे कि या तो मैं ट्यूमर को बाहर निकलवा लूं या फिर अपने पैर को शरीर से अलग करवा लूं। लेकिन जब मैंने इस पर शोध किया और लोगों से मिली तो पाया कि अगर मैं ट्यूमर को एक बार के लिए बाहर भी निकलवा दूं तो उसके दोबारा जल्दी बढ़ने की संभावना है। मैंने निर्णय लिया कि मैं अपने पैर को ही शरीर से अलग करवाऊंगी और रोटेशनप्लास्टी की सहायता से इस समस्या को एक बार में ही खत्म कर दूंगी।'
उन्होंने आगे कहा, 'मुझे उस वक्त पता नहीं चल पा रहा था कि मैं इस समय भी सकारात्मक कैसे हूं मेरी जिंदगी डाव पर लगी थी लेकिन मैंने हार नहीं मानी मैं हमेशा खुश और जिंदादिल इंसान थी और मैंने अपना यही गुण इस कठिन समय में भी कायम रखा। जब मुझे कैंसर होने का पता चला तो मैंने अपने पापा से कहा, 'चलो यार, अब ज्यादा उदास मत हो। हंसो, मुस्कुराओ जो होना था वो हो गया। इस समय मुझे आपका साथ चाहिए बस ताकि मई इस परिस्थिति लड़ सकूं और मैं ये आपके साथ के बिना बिलकुल नहीं कर सकती। मैं अकेले यह काम नहीं कर सकती। मैं रोना-धोना नहीं चाहती।'
जिंदगी ने जिलीयन को जो भी दिया वो उसे लेकर बहुत ही उत्साहित थी। वे सच में जन्मजात फाइटर हैं। वे अभी भी हफ्ते में तीन बार अपने ट्रेनर के साथ वॉलीबॉल की ट्रेनिंग लेती हैं और पेशेवर वॉलीबॉल खेलने की ओर ध्यान केंद्रित करती हैं। मुझे अपना खोया हुआ पैर याद नहीं आता जो थोडा अजीब है। मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है कि मैं राष्ट्रीय महिला टीम के लिए पैरालिंपिक्स में खेलूं। और मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं यह कर पाउंगी।
साथ ही मैं मिस टेक्सास में भाग लेना चाहती हूं इसिलिए मैं अपने शरीर को वापस उसी स्थिती में ले जाना चाहती हूं जहाँ इसे होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, मेरे जीवन का लक्ष्य है कि मैं खुद को अलग बनाऊं। मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि मैं इस वक्त कैंसर होने के बावजूद जो भी अपने जीवन में मैं वही कर रही हूं। उन्होंने आगे कहा, “मेरे जीवन का लक्ष्य है कि मैं खुद को अलग बनाऊं। मुझे ऐसा लगता है मई इससे और प्रबल हुई हूँ और जैसी जिंदगी चाहती थी वैसी जी रही हूं।
Published on:
18 Jan 2018, 11:34 AM IST
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