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GST का एक साल बंद हो गये सैकड़ों कारखाने,लाखों पीतल कारीगर हो बेरोजगार

मुरादाबाद में पीतल उद्योग से जुड़े निर्यातक और कारीगर व कारखानेदार उद्योग पर छाये संकट से परेशान हैं। यहां 300 से ज्यादा छोटे बड़े कारखाने बंद हो गए।
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मुरादाबाद

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Jai Prakash

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Updated: 1 Jul 2018, 1:48 PM IST

moradabad

GST का एक साल बंद हो गये सैकड़ों कारखाने,लाखों पीतल कारीगर हो बेरोजगार

मुरादाबाद: केंद्रीय कर जीएसटी को लागू हुए आज एक साल पूरा हो गया है। सरकार इसे उप्लाब्धि के रूप में इसका जश्न मना रही है। वहीँ इसके उलट मुरादाबाद में पीतल उद्योग से जुड़े निर्यातक और कारीगर व कारखानेदार उद्योग पर छाये संकट से परेशान हैं। एक साल के दौरान यहां 300 से ज्यादा छोटे बड़े कारखाने बंद हो गए। यही नहीं इससे एक लाख से अधिक पीतल कारीगर बेरोजगार हो गए। जो पलायन कर अगये या फिर रोजी रोटी के लिए दूसरा धंधा करने को मजबूर हैं। टीम पत्रिका ने आज शहर में एक साल में बंद हो चुके ऐसे ही कारखानों का जायजा लिया और इनके मालिकों से हालातों को लेकर बात की।

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इस वजह से बंद हो गए कारखाने

हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन से जुड़े नुमान मंसूरी हमें गल्शाहीद में बंद कारखाने में ले गए,जो पिछले एक साल से जीएसटी लागू होने के बाद बंद हो गया। यहां के मलिक मोहम्मद नवी ने बताया कि उनके यहां पुश्तैनी पीतल कारीगरी का काम होता आया है। हर समय लगभग बीस से तीस कारीगर उनके कारखाने में काम करते थे। लेकिन जीएसटी के बाद बड़ी एक्सपोर्ट फर्म से काम मिलना बंद हो गया। जीएसटी की जटिलताओं को उनके जैसे कारखाने दार नहीं समझ सके। लिहाजा बंद करना पड़ा। नुमान मंसूरी ने बताया कि इसी तरह शहर में तीन सौ से अधिक कारखाने बंद हो गए। सरकार को पहले इसके लिए व्यवस्थाएं बनानी चाहिए थीं। ऐसा हो नहीं पाया। जिसका विपरीत असर पीतल उद्योग पर पड़ा।

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इतना कारोबार प्रभावित

वहीँ उधर कारखानादार एसोसिएशन के अध्यक्ष आज़म अंसारी के मुताबिक मुरादाबाद से एक साल पहले जो निर्यात 12 हजार करोड़ का था वप घटकर अब 7 हजार करोड़ पहुंच गया है। घरेलू निर्यात भी घट गया है। उन्होंने बताया कि मुरादाबाद में ये उद्योग एक कुटीर उद्योग की तरह है। इसमें लोग अपने घरों में काम करते हैं,जीएसटी के बाद उन्हें काम मिलना बंद हो गया। इस कारण एक लाख से अधिक लोग एक झटके में बेरोजगार हो गए। सरकार के इस कानून से बेरोजगारी बढ़ी है। जो अच्छा पीतल कारीगर था वो यहां से पलायन कर गया या फिर दूसरी मेहनत मजदूरी कर रहा है।

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पहले ये थी व्यवस्था

इन लोगों ने बताया कि जो बड़े एक्सपोर्ट हाउस हैं वो पहले छोटे कारखाना संचालकों को आर्डर देते थे। लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद उन्होंने काम देना बंद कर दिया। क्यूंकि पहले हैंडीक्राफ्ट पूरी तरह ड्यूटी फ्री था। निर्यातक को सबसे आखिर में एक्सपोर्ट के बाद सेल्स टैक्स में हिसाब देना होता था। लेकिन अब 18 प्रतिशत जीएसटी पहले ही चुकाना पड़ रहा है। और रिफंड में इतना समय लग रहा है कि कैपिटल मनी फंस गयी। इतना बड़ी रकम बड़े एक्सपोर्टर तो फंसा पा रहे हैं। लेकिन छोटे कारखानों के मलिक जो नगद मजदूरी पर काम करते या कराते थे। उनके लिए मुश्किल हो गयी। लिहाजा बंद करना पड़ा। सरकार इस पर नये सिरे विचार कर इस उद्योग को बचाए।