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मुरादाबाद में एल एंड टी ने एनजीटी को दिखाया ठेंगा, रामगंगा नदी में 100 मीटर अंदर तक बना डाले पम्प

जिन जगहों पर पम्पिंग स्टेशन बने है वहां तटबंध बनना है। ऐसे में इन सभी पम्पिंग स्टेशन पर टूटने का खतरा भी मंडरा रहा है।
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मुरादाबाद

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Jai Prakash

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Updated: 3 Mar 2018, 12:11 PM IST

moradabad

मुरादाबाद: जनपद में जल निगम और एल एंड टी कंपनी ने एन जी टी के आदेशो को ठेंगा दिखा दिया है। एन जी टी के सभी नियमो ओर आदेशो को धत्ता बताते हुए इन दोनों निर्माण एजेंसियों ने रामगंगा नदी में 100 मीटर अंदर तक 3 पम्पिंग स्टेशन बना डाले। यहां खास बात यह है की जिन जगहों पर पम्पिंग स्टेशन बने है वहां तटबंध बनना है। ऐसे में इन सभी पम्पिंग स्टेशन पर टूटने का खतरा भी मंडरा रहा है। उधर मुरादाबाद के मेयर ने इन निर्माणों पर अपनी आपत्ती दर्ज कराते हुए साफ कर दिया है की तटबंध के दायरे में जो भी निर्माण आएगा उसे तोड़ा जाएगा।

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मुरादाबाद में देश की नामी कंपनी एल एंड टी ओर जल निगम ने 11 पम्पिंग स्टेशन का निर्माण शुरू किया। लेकिन दोनों निर्माण एजेंसियों के अधिकारियों ने एन जी टी के सभी नियमो ओर आदेशो को दरकिनार कर दिया। अधिकारियों ने आंखे बंद करके रामगंगा नदी मैं 100 मीटर अंदर तक करोड़ो की लागत से 3 पम्पिंग स्टेशन बना डाले। हैरानी की बात यह है की जिन जगहों पर करोड़ो के पम्पिंग स्टेशन बनाये गए है वहां से तटबंध जाना प्रस्तावित है। ऐसे में इन निर्माणों पर अपनी आपत्ती दर्ज कराते हुए मुरादाबाद के मेयर विनोद अग्रवाल ने साफ कर दिया है की तटबंध के रास्ते में आने वाले सभी निर्माण तोड़े जाएंगे। हालाकी एल एंड टी कंपनी द्वारा किये गए इन अवैध निर्माणों के लिए मेयर विकास प्राधिकरण को भी जिम्मेवार मान रहे है।

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उधर एल एंड टी द्वारा बनाये गए पम्पिंग स्टेशन के तटबंध की जद में आने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। मेयर की आपत्ति ओर उनके बयान के बाद अब जल निगम के अधिकारियों को सांप सूंघ गया है। असल में ठेकेदार कंपनी ने जब रामगंगा में घुसकर अवैध निर्माण शुरू किया तब जल निगम के बड़े अधिकारी नींद में सोए रहे। लेकिन अब पम्पिंग स्टेशन बनने के बाद उन्हें एन जी टी के नियमो ओर आदेशो का ख्याल आया। हालाकी चीफ इंजीनियर राजीव शर्मा जल निगम रामगंगा की इन ज़मीनों को नगर निगम द्वारा दिया जाना बता रहे है।

बहरहाल एल एंड टी ओर जल निगम ने रामगंगा नदी की सीमा में पंपिंग स्टेशन बनाकर एन जी टी के आदेश का उलंघन तो किया ही है। वहीं तटबंध की जद में आने से करोड़ो की लागत से बने तीनों पम्पिंग स्टेशन अब टूटने की कगार पर भी आ गए है। ऐसे में सरकार के करोड़ो रूपये डूबने का जिम्मेवार कौन होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है।