प्रेम में पड़ने के बाद महारावल पद्मिनी से शादी करके उन्हें चित्तौड़ लेकर आते हैं। इसी बीच राज्य के पुरोहित राघव चेतन को कुछ कारणों के चलते देश निकाल दिया जाता है । इसी वजह से वे चिड़कर दिल्ली पहुंच जाते हैं और अलाउद्दीन खिलजी को रानी पद्मावती की खूबसूरती के बारे में बता देते हैं। पुरोहित की बातों से प्रभावित होकर अलाउद्दीन, चित्तौड़ पर आक्रमण करने का ऐलान कर देता है और वहां जाकर महारावल के साथ छल करते हुए उन्हें बंदी बनाकर दिल्ली ले आता है। इसके बाद वे महाराजा को छोड़ने के लिए एक शर्त रखता है कि वे एक बार महारानी पद्मावती को देखना चाहता है। इसके बाद कहानी में कई मोड़ आते हैं अंत में जीत राजपूतों के शौर्य और पराक्रम की होती है।