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‘मंत्रियों के जानवर भी ऐसी जगह न रहें’: महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों की बदहाली पर बरसे अभिजीत दीपके, नए अभियान का ऐलान

Abhijeet Dipke: महाराष्ट्र में आश्रम स्कूलों में आदिवासी छात्रों की सुविधाओं को लेकर सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दो साल में 590 से अधिक छात्रों की मौत का दावा करते हुए 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान की घोषणा की है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Sep 16, 2026

Maharashtra Ashram Schools

अभिजीत दीपके (Photo: IANS)

Maharashtra Ashram School News: महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों और आदिवासी छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। नागपुर में कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आदिवासी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताते हुए 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू करने की घोषणा की है। अभियान की शुरुआत 17 सितंबर से गढ़चिरौली से किए जाने की जानकारी सामने आई है।

सीजेपी फाउंडर दीपके ने आरोप लगाया कि आदिवासी छात्रों के लिए चलने वाले कई स्कूलों में शिक्षा के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि जिन परिस्थितियों में ये बच्चे पढ़ रहे हैं, उनमें बेहतर शिक्षा की उम्मीद करना मुश्किल है। उन स्कूलों की हालत ऐसी है कि कोई भी मंत्री अपने जानवरों तक को वहां नहीं रखेगा।

'दो साल में 590 से ज्यादा आदिवासी छात्रों की मौत का दावा'

अभिजीत दीपके ने दावा किया कि महाराष्ट्र की आश्रम स्कूलों में पिछले दो वर्षों के दौरान 590 से अधिक आदिवासी छात्रों की मौत हुई है। उन्होंने इन मौतों को खराब व्यवस्था, देखभाल की कमी और सुरक्षा संबंधी समस्याओं से जोड़ते हुए राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन स्कूलों में मिलने वाला खाना खराब क्वालिटी का होता है। सांप के काटने की घटनाएं भी छात्रों की जान जाने की वजह है। लेकिन इस पर कोई कुछ नहीं बोलता। क्या आदिवासी छात्रों की सुरक्षा और जीवन के प्रति यही प्राथमिकता होनी चाहिए?

खराब भोजन और जमीन पर सोने का भी आरोप

दीपके ने आश्रम स्कूलों में छात्रों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बच्चों को कई बार ऐसा भोजन दिया जाता है जिसे खाकर वह अस्पताल पहुंच जाते हैं। उन्होंने हॉस्टल में पर्याप्त बिस्तरों की व्यवस्था नहीं होने का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि छात्रों को मजबूरी में फर्श पर सोना पड़ता है। जिस वजह से सांप के काटने जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

'बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं मिलना उनका अधिकार'

दीपके ने कहा कि आदिवासी समुदाय का देश के संसाधनों पर पहला हक होता है, इसी तरह उनका शिक्षा पर भी पहला हक होना चाहिए। उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को सम्मान, उचित देखभाल, सुरक्षित आवास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना कोई विशेष सुविधा नहीं, बल्कि उनके बुनियादी अधिकारों से जुड़ा विषय है।

पिछले महीने सांप ने 6 लड़कियों को डसा, 3 की मौत

9 अगस्त की रात में गढ़चिरौली जिले में एक आश्रम स्कूल में जहरीले सांप के डसने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी, जबकि तीन अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिला प्रशासन के मुताबिक, घटना आधी रात के करीब धनौरा तहसील मुख्यालय से लगभग 10 किमी दूर जापतलाई गांव स्थित सहायता प्राप्त आदिवासी आश्रम स्कूल के छात्रावास में हुई। फर्श पर सो रही 6 नाबालिग छात्राओं को जहरीले सांप ने डस लिया। इनमें से आठ, 12 और 14 साल की तीन छात्राओं की मौत हो गई। इस मामले में कई अधिकारियों पर गाज भी गिरी थी और उन्हें निलंबित किया गया था।

बता दें कि आदिवासी छात्रों की समस्याओं को लेकर महाराष्ट्र में हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। नासिक में आदिवासी छात्रों ने आश्रम स्कूलों और हॉस्टल से जुड़ी समस्याओं, भोजन, सुरक्षा तथा अन्य मांगों को लेकर आंदोलन किया था। दीपके ने सितंबर की शुरुआत में प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात भी की थी। इसके बाद छात्रों ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी थी।

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