
मनोज जरांगे के अनशन का 14वां दिन, अभिजीत दीपके मिलने पहुंचे (Photo: X/@abhijeet_dipke)
Manoj Jarange Maratha Andolan: मराठा समाज को आरक्षण दिलाने की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का अनशन आज 14वें दिन भी जारी है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने अंतरवली सराटी पहुंचकर मनोज जरांगे से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोला और सवाल किया कि आखिर सरकार को मराठा कार्यकर्ता के गांव अंतरवली सराटी आकर बातचीत करने में क्या दिक्कत है? जबकि इस सबके के लिए खुद सरकार ही जिम्मेदार है। हालांकि, दीपके ने जरांगे से अपना अनशन वापस लेने की अपील भी की।
अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र की भाजपा नीत महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार संवेदनहीन हो गई है। मनोज जरांगे अपने लिए नहीं, बल्कि मराठा समाज के लिए अनशन कर रहे हैं। उनका उद्देश्य मराठा समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर दिलाना है।
दीपके ने कहा, “अगर आपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और रोजगार दिया होता तो उन्हें अनशन करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। यह आपकी विफलता है। आपको लोगों के काम करने के लिए चुना गया था, सत्ता में बैठाया गया था, लेकिन आपने उनके काम नहीं किए और लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया।”
दीपके ने हाल ही में खुदकुशी करने वाले प्रथमेश देशमुख का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह प्रथमेश के परिवार से मिलने गए थे। दीपके के कहा कि 27 वर्षीय प्रथमेश ने ढाई लाख रुपये के कर्ज के कारण जान दे दिया। ऐसे युवाओं को रोजगार और सुविधाएं मिलें, इसी उद्देश्य से मनोज जरांगे पाटील अनशन कर रहे हैं। उनकी लड़ाई प्रथमेश जैसे युवाओं के लिए भी है।
अभिजीत दीपके ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार के नेता अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेज रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों के बच्चों के पास अच्छी शिक्षा पाने का जरिया नहीं हैं। उन्होंने सवाल किया, “आप अपने बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेज रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों के बच्चों के पास ठीक से पढ़ने के लिए स्कूल तक नहीं हैं। शहर जाकर पढ़ाने की उनके परिवार की आर्थिक स्थिति नहीं है। फिर इन बच्चों को क्या करना चाहिए?”
सीजेपी प्रमुख ने आगे कहा, मनोज जरांगे के अनशन को 14 दिन हो चुके हैं। दिल्ली में सोनम वांगचुक को भी 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठने दिया, क्या यह सरकार यहां भी वही दोहराना चाहती है? आखिर सरकार को यहां आकर सीधे बात करने में क्या दिक्कत है?
अभिजीत दीपके ने एक तरफ सरकार से मनोज जरांगे के साथ बातचीत करने की मांग की, वहीं दूसरी तरफ मराठा आरक्षण आंदोलन की अगुवाई कर रहे मनोज जरांगे से अनशन वापस लेने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को उनकी जरूरत है और उन्हें अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दीपके ने कहा कि यदि सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को अच्छी शिक्षा और पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए होते, तो मनोज जरांगे को आज अनशन करने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने दावा किया कि जरांगे का अनशन इस बात का संकेत है कि लोगों का सरकार पर कोई भरोसा नहीं रहा है।
मराठा आरक्षण की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा था कि सरकार संविधान के दायरे में जो भी संभव होगा, वह करेगी, लेकिन एक समुदाय का हिस्सा लेकर दूसरे समुदाय को नहीं दे सकती। फडणवीस ने कहा था कि सरकार ने बातचीत के दरवाजे कभी बंद नहीं किए हैं और चर्चा के जरिए समाधान निकालने की प्रक्रिया जारी है।
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के प्रतिनिधि मंडल ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे से मुलाकात की थी और उन्हें अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की थी, लेकिन जरांगे ने इससे साफ इनकार कर दिया था। मनोज जरांगे ने चेतावनी दी है कि अगर 11 सितंबर तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे अपना विरोध प्रदर्शन मुंबई ले जाएंगे। वह मराठों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर 29 अगस्त से जालना स्थित अपने गांव अंतरवली सराटी में अनशन पर बैठे हैं।
Updated on:
11 Sept 2026 02:54 pm
Published on:
11 Sept 2026 02:34 pm
