
CJP और अभिजीत दीपके पर घायल प्रदर्शनकारियों का बड़ा आरोप (Photo: IANS)
नीट पेपर लीक को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिली थी। इसी मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक आंदोलन किया गया। आंदोलन के दौरान संसद की ओर निकाले गए मार्च में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ था। अब इस प्रदर्शन में घायल हुए कुछ छात्रों ने अभिजीत दीपके की सीजेपी पर ही सवाल उठाए हैं।
घायल प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी न तो अभिजीत दीपके और न ही सीजेपी की ओर से किसी ने उनकी सुध ली। छात्रों का कहना है कि आंदोलन खत्म होने के बाद सीजेपी की ओर से न तो कोई फोन या मैसेज आया और न ही किसी ने उनकी तबीयत के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की।
नीट परीक्षा के पेपर लीक के विरोध में सीजेपी की ओर से जंतर-मंतर पर करीब एक महीने तक आंदोलन चलाया गया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी।
आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च निकालने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच आमना-सामना हुआ और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया।
इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। कुछ घायलों को गंभीर चोटें आईं और उनका इलाज अभी भी चल रहा है।
इस आंदोलन में नजफगढ़ निवासी युवा साहिल लोछाब भी गंभीर रूप से घायल हुआ था। उनके परिवार के मुताबिक, पैलेट गन के छर्रे लगने के कारण उनकी आंख की रोशनी चली गई। परिवार का कहना है कि साहिल की आंख का दो बार ऑपरेशन हो चुका है, लेकिन अभी तक उनकी आंखों की रोशनी वापस नहीं आई है। परिवार इस समय आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है।
साहिल और उनके परिवार ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि आंदोलन में शामिल होने के बाद उन्हें गंभीर चोट का सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में संगठन की ओर से उनकी स्थिति जानने के लिए कोई संपर्क नहीं किया गया।
बिहार के रहने वाले एक अन्य घायल युवक प्रशांत ने भी सीजेपी को लेकर नाराजगी जताई है। प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के छर्रे लगने से वह भी घायल हुआ थे और अभी तक पूरी तरह ठीक नहीं हुआ हैं।
प्रशांत का कहना है कि आंदोलन के बाद मदद करना तो दूर, CJP के किसी नेता ने उनकी तबीयत पूछने के लिए एक सामान्य फोन तक नहीं किया। उन्होंने कहा कि जिस आंदोलन में वे संगठन की मांगों के समर्थन में शामिल हुए थे, उसी आंदोलन में घायल होने के बाद उन्हें खुद को अकेला महसूस हुआ।
बता दें कि 20 जुलाई को सीजेपी के 'संसद मार्च' के दौरान 50 से ज्यादा छात्र व प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों ने भी सवाल उठाए थे और सरकार को घेरा था।
अब घायल प्रदर्शनकारियों द्वारा सीजेपी पर लगाए जा रहे आरोपों ने आंदोलन के आयोजन और उसके बाद घायलों की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, घायल छात्रों के आरोपों पर सीजेपी की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
Updated on:
19 Aug 2026 03:08 pm
Published on:
19 Aug 2026 02:37 pm
