
बॉम्बे हाई कोर्ट (Photo: IANS)
Cycle Parking Fine Mumbai: मुंबई में साइकिल पार्क करने को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। एक हाउसिंग सोसायटी ने सीढ़ियों के पास साइकिल खड़ी करने पर अपने ही दो सदस्यों पर 15 लाख रुपये से अधिक का भारी-भरकम जुर्माना ठोक दिया। इस मनमाने फैसले पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सोसायटी और सहकार उपनिबंधक (Deputy Registrar) दोनों को कड़ी फटकार लगाई है तथा जुर्माने के आदेश को रद्द कर दिया है।
यह मामला मुंबई की धनलक्ष्मी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी का है। सोसायटी की दो सदस्य योगिनी और सेजल पर आरोप था कि उन्होंने इमारत की सीढ़ियों के पास मौजूद खाली जगह में करीब 11 वर्षों तक साइकिल पार्क की। सोसायटी ने दोनों को कई बार नोटिस जारी किए और बाद में कथित नियम उल्लंघन के लिए भारी जुर्माने की मांग की। मामला वसूली के लिए सहकार विभाग के उपनिबंधक तक पहुंचा। उपनिबंधक ने पिछले साल अप्रैल में वसूली प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया। इसके बाद दोनों फ्लैटधारकों ने पुनर्विचार के लिए आवेदन किया। जिस पर उपनिबंधक ने वसूली प्रमाणपत्र रद्द कर दिया, लेकिन जुर्माने की रकम को लेकर मामले को दोबारा विचार के लिए भेज दिया।
सोसायटी के फैसले से परेशान दोनों सदस्यों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सोसायटी की कार्रवाई और जुर्माना लगाने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए। हाई कोर्ट ने कहा कि एक मामूली मामले में इतना बड़ा जुर्माना लगाना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मॉडल उप-नियम 169(अ) का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने सोसायटी के कामकाज में विवेक और वाजिबता की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही कहा कि सोसायटी को खुद को सर्वोच्च नियामक प्राधिकरण की तरह पेश नहीं करना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि अगर सोसायटी को सीढ़ियों के पास साइकिल खड़ी करने पर आपत्ति थी, तो साइकिल रखे जाने के समय ही आपत्ति दर्ज कर उसे हटाने का निर्देश देना चाहिए था। इसके बजाय वर्षों तक इस स्थिति को जारी रहने देना और बाद में 11 साल की अवधि के लिए भारी जुर्माना लगाना सही नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने माना कि हाउसिंग सोसायटी में नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन नियमों का इस्तेमाल मनमाने और अविवेकपूर्ण तरीके से जुर्माना वसूलने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने सोसायटी की ओर से मॉडल उप-नियम 169(अ) अपनाए जाने को लेकर भी रिकॉर्ड में स्पष्टता नहीं होने की ओर इशारा किया। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने सोसायटी द्वारा लगाया गया 15,45,730 रुपये का जुर्माना रद्द कर दिया और दोनों फ्लैटधारकों को बड़ी राहत मिली।
Updated on:
31 Aug 2026 11:35 am
Published on:
31 Aug 2026 11:35 am
