
मंत्री चंद्रकांत पाटील और सीएम देवेंद्र फडणवीस (Photo: IANS)
Pune Law College fee refund: पुणे के प्रसिद्ध आईएलएस लॉ कॉलेज (ILS Law College) को अतिरिक्त फीस वसूली के मामले में बड़ा झटका लगा है। महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील ने कॉलेज को पूर्व छात्र मयूर गरुड से वसूली गई 1,04,863 रुपये की अतिरिक्त फीस ब्याज समेत वापस करने का आदेश दिया है। कॉलेज को फीस की रकम पर भुगतान किए जाने तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
यह मामला उस समय सामने आया जब ILS लॉ कॉलेज ने उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा फीस वापस करने के दिए गए आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। बाद में अदालत में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पहले के आदेश वापस लेकर कॉलेज की दलील सुनने के बाद नए सिरे से आदेश जारी किया जाएगा। अब इसी प्रक्रिया के तहत शिक्षा मंत्री ने नया आदेश जारी किया है।
आदेश में कहा गया है कि ILS लॉ कॉलेज द्वारा ली गई 'अन्य शुल्क के अलावा' (Other than Other Fees) के लिए सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय से आवश्यक पूर्व अनुमति ली गई थी, ऐसा प्रतीत नहीं होता। महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 2016 के तहत ऐसी फीस वसूली के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
आदेश के मुताबिक, मयूर गरुड से ली गई 1,04,863 रुपये की रकम वापस की जानी चाहिए। साथ ही फीस जमा किए जाने की तारीख से लेकर वास्तविक रिफंड किए जाने की तारीख तक 6 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।
इस मामले में उच्च शिक्षा निदेशक शैलेंद्र देवलाणकर ने इससे पहले 15 अप्रैल को आदेश जारी किया था। इसमें भी ILS लॉ कॉलेज द्वारा वसूली गई फीस को नियमों के विपरीत बताते हुए मयूर गरुड को रकम वापस करने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि, कॉलेज ने इस आदेश को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कहा था कि पहले के आदेश वापस लिए जाएंगे, जांच रिपोर्ट कॉलेज को उपलब्ध कराई जाएगी और उसका पक्ष सुना जाएगा। इसके बाद चार सप्ताह के भीतर नया आदेश जारी करने की बात कही गई थी। अब शिक्षा मंत्री की ओर से नया आदेश जारी कर दिया गया है।
आदेश के बाद मयूर गरुड ने कहा कि अब यह मामला सिर्फ एक संस्था के खिलाफ लगाए गए एक आरोप तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, ILS लॉ कॉलेज द्वारा अतिरिक्त फीस वसूली की प्रक्रिया की तीन अलग-अलग मौकों पर जांच हुई है और हर बार अधिकारियों के निष्कर्ष कॉलेज के खिलाफ रहे हैं।
गरुड ने सरकार से मांग की कि उन सभी शैक्षणिक संस्थानों का व्यापक ऑडिट कराया जाना चाहिए, जो सक्षम विश्वविद्यालय, फीस निर्धारण समिति, सरकार या किसी अन्य वैधानिक प्राधिकरण की मंजूरी के बिना अतिरिक्त, अधिक या अनधिकृत फीस वसूल रहे हैं।
इस मामले का असर अब सिर्फ एक पूर्व छात्र तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। अप्रैल में फीस वापसी के पहले आदेश के बाद ILS लॉ कॉलेज के सैकड़ों वर्तमान और पूर्व छात्रों ने कॉलेज तथा उच्च शिक्षा निदेशालय के कार्यालय में आवेदन जमा किए थे।
इन छात्रों ने भी अपने द्वारा जमा की गई अतिरिक्त फीस वापस करने की मांग की थी। यदि इन दावों पर भी फीस वापसी का आदेश होता है, तो कॉलेज को करोड़ों रुपये का रिफंड करना पड़ सकता है।
Updated on:
4 Sep 2026, 1:00 PM IST
Published on:
4 Sep 2026, 12:59 PM IST
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