
सीएम फडणवीस को क्या मिला है कोई नया ‘वीटो पावर’? (Photo: IANS)
Maharashtra Cabinet Decision: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नए ‘रूल्स ऑफ बिजनेस’ (Rules of Business) के तहत मंत्रियों के फैसलों को पलटने की ‘वीटो पावर’ मिलने की खबरों पर राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। 'एएनआई' ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि मुख्यमंत्री के पास मंत्रियों के फैसलों को रद्द या वापस लेने का अधिकार कोई नया प्रावधान नहीं है। यह अधिकार 1975 से लागू 'रूल्स ऑफ बिजनेस' के तहत पहले से ही मुख्यमंत्री के पास मौजूद था।
सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि नए नियमों में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि मुख्यमंत्री को यह अधिकार पहली बार दिया गया है। संविधान के तहत मंत्रियों को मिलने वाली शक्तियां मूल रूप से मुख्यमंत्री के पास होती हैं। मुख्यमंत्री विभिन्न विभागों का आवंटन करते समय इन शक्तियों को संबंधित मंत्रियों को सौंपते हैं। इसलिए सामान्य प्रशासनिक मामलों में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास रहता है।
हालांकि, मंत्रियों द्वारा अर्ध-न्यायिक मामलों में लिए गए फैसलों की स्थिति अलग है। ऐसे मामलों में मंत्री अपने अधिकार का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करते हैं और उनका फैसला अंतिम माना जाता है। इन फैसलों के खिलाफ सामान्य तौर पर अपील का प्रावधान नहीं होता और संबंधित पक्ष हाई कोर्ट का रुख कर सकता है।
राज्य सरकार की ओर से बताया गया है कि महाराष्ट्र के 'रूल्स ऑफ बिजनेस' में बदलाव की प्रक्रिया काफी पहले शुरू हो गई थी। अक्टूबर 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सरकार के 'रूल्स ऑफ बिजनेस' में संशोधन के लिए एक अध्ययन समूह का गठन किया था। इस समूह में तत्कालीन मुख्य सचिव सीताराम कुंटे के अलावा मनुकुमार श्रीवास्तव, सुजाता सौनिक, देबाशीष चक्रवर्ती और श्रीकांत देशपांडे शामिल थे।
जुलाई 2021 में उद्धव ठाकरे सरकार ने एक नए और संशोधित अध्ययन समूह का गठन किया। इसमें तत्कालीन मुख्य सचिव मनुकुमार श्रीवास्तव, सुजाता सौनिक, देबाशीष चक्रवर्ती, संजय चहांदे, भूपेंद्र गुरव और विकास चंद्र रस्तोगी को शामिल किया गया था। फरवरी 2022 में समूह ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। उस समय उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे। इसके बाद फरवरी 2024 में जब एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने थे, तब अध्ययन समूह ने मंत्रिमंडल की बैठक में अपनी रिपोर्ट पेश की।
इसके बाद जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के सामने इस रिपोर्ट को प्रेजेंट किया गया। कुछ दिनों बाद राज्य मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दे दी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, नए रूल्स ऑफ बिजनेस तैयार करते समय केंद्र सरकार और दूसरे राज्यों में लागू नियमों का भी अध्ययन किया गया। महाराष्ट्र में 1975 से रूल्स ऑफ बिजनेस लागू थे। समय-समय पर इनमें कुछ संशोधन किए गए, लेकिन इतने वर्षों में इनका व्यापक स्तर पर बदलाव नहीं हुआ था। इससे पहले 1990 में भी कुछ संशोधन किए गए थे।
अब नियमों की संख्या 15 से बढ़ाकर 48 कर दी गई है। इसी तरह पहले दो शेड्यूल थे, जिन्हें बढ़ाकर अब चार कर दिया गया है। नियम 10 के अनुसार, तीसरी अनुसूची में शामिल मामलों को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य है। वहीं, नियम 11 के तहत चौथी अनुसूची के मामलों को मुख्यमंत्री के माध्यम से राज्यपाल को भेजा जाता है। तीसरी अनुसूची में कुल 34 विषय शामिल किए गए हैं, जिन्हें अंतिम मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजा जाता है।
राज्य सरकार का कहना है कि यह बदलाव प्रशासनिक प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
Updated on:
20 Aug 2026 09:26 am
Published on:
20 Aug 2026 08:39 am
