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अभिजीत दीपके ने मांगा फडणवीस के मंत्री का इस्तीफा, कहा- मंत्रियों के कुत्तों को भी सरकारी स्कूलों से अच्छी सुविधाएं

Abhijeet Dipke CJP: महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' संयोजक अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में छात्रों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Aug 20, 2026

abhijeet dipke Cockroach Janata Party

अभिजीत दीपके और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस (Photo: IANS)

Maharashtra Government Schools condition: महाराष्ट्र में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने देवेंद्र फडणवीस सरकार और स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भुसे पर तीखा हमला बोला है। दीपके ने दादा भुसे के इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि राज्य के कई सरकारी स्कूलों में छात्रों को आज भी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके ने आज लातूर जिले की औसा तहसील के उजनी गांव स्थित एक जिला परिषद स्कूल का दौरा किया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति के लिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसके लिए जनता को आवाज उठानी चाहिए।

‘बच्चों से बेहतर सुविधाएं मंत्रियों के कुत्तों को’

अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कई स्कूलों में अच्छी कक्षाएं, पर्याप्त बेंच, शौचालय और स्कूल तक पहुंचने के लिए सुरक्षित रास्ते जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर छात्रों को जानवरों से भी बदतर परिस्थितियों में पढ़ना पड़ रहा है। इसी दौरान उन्होंने सरकार पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि मंत्रियों के कुत्तों को भी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।

दीपके ने कहा कि यह छात्रों की जिंदगी और उनके भविष्य का सवाल है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नेताओं से सवाल पूछें कि अगर वे बच्चों की शिक्षा के लिए काम नहीं करते तो जनता उन्हें वोट क्यों दे।

‘पहले शिक्षा के लिए काम करें, फिर वोट मांगें’

सीजेपी प्रमुख ने लोगों से राजनीतिक दलों के नेताओं पर शिक्षा के मुद्दे पर काम करने का दबाव बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि गांव में वोट मांगने आने वाले नेताओं से साफ कहा जाना चाहिए कि पहले शिक्षा के लिए काम करें और उसके बाद वोट मांगने आएं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मुद्दों पर लोग जाति और समुदाय के झंडे लेकर सड़कों पर उतरते हैं। इसी तरह बच्चों के स्कूलों और उनके भविष्य के लिए भी लोगों को आवाज उठानी चाहिए।

‘मंत्री और विधायक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाएं’

अभिजीत दीपके ने कहा कि मंत्रियों और विधायकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजना चाहिए। इससे उन्हें समझ आएगा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों और उनके परिवारों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

जब उनसे पूछा गया कि क्या दादा भुसे को स्कूली शिक्षा मंत्री के पद पर बने रहना चाहिए, तो दीपके ने कहा कि राज्य के स्कूलों की स्थिति देखकर उन्हें लगता है कि शिक्षा मंत्री को पद पर नहीं बने रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में सरकारी स्कूलों की समस्याओं की गंभीरता समझना चाहती है तो मंत्रियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने बच्चों की शिक्षा इन्हीं सरकारी विद्यालयों में करवानी चाहिए।

‘10 साल में बुनियादी समस्याएं दूर नहीं हुईं’

दीपके ने भाजपा नीत महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कई वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद सरकारी स्कूलों की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। उन्होंने दावा किया कि आज भी कई छात्र ऐसे स्कूलों में पढ़ रहे हैं जहां टीन की छतों से बारिश का पानी टपकता है और बच्चों के लिए पर्याप्त बेंच तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर 10 साल में स्कूलों की ऐसी बुनियादी समस्याएं दूर नहीं की जा सकीं तो सत्तारूढ़ पक्ष ने आखिर क्या हासिल किया?

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सरकार को घेरने की तैयारी

कॉकरोच जनता पार्टी ने पिछले सप्ताह ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया था। दीपके ने कहा कि सीजेपी और स्थानीय लोग मिलकर सरकारी स्कूलों की समस्याओं को सामने लाएंगे। उन्होंने कहा कि जो बच्चे कई किमी पैदल चलकर स्कूल जाते हैं, उनके लिए सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की मांग सरकार के सामने रखी जाएगी।

दीपके ने चेतावनी दी कि यदि युवाओं और छात्रों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया तो युवा मतदाता आने वाले समय में सरकारों से जवाब मांगेंगे। यदि सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने में सरकार नाकाम रही तो गांवों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं।

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