
Mumbai Big Issue News In Hindi : ऐतिहासिक किला-समुद्र के सौंदर्य से लकदक वसई पर कैसे लगा पहाड़ऩुमा कचरा का दाग
धर्मेंन्द्र निगम
वसई . पिछले तीन महीने से मनपा का डंपिंग ग्राउंड सुलग कर स्थानीय लोगों की जिंदगी में जहर घोल रहा है। जनता को मनपा के डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाले जहरीले धुंए से घुट-घुट कर जीना पड़ा रहा हैं। वसई पूर्व स्थित भोईदा पाडा डंपिंग ग्राउंड में घन कचरा व्यवस्थापन की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसके कारण पिछले एक दशक से लाखों टन कचरा यहां जमा हो गया हैं। मनपा ने घन कचरा व्यवस्थापन की व्यवस्था करने का दावा तो जरूर किया लेकिन, हकीकत में केवल कचरा का पहाड़ ही दिखाई दे रहा है।
आग बुझाने का कारगर उपाय नहीं
भोएदा पाडा स्थित मनपा के एकमात्र डंपिंग ग्राउंड में तीन माह पूर्व लगी भीषण आग अब तक नहीं बुझाई जा सकी है। मनपा का अग्निशमन विभाग अमूमन रोजाना ही आग पर दर्जनों टैंकर पानी बर्बाद कर रहा है। बाबजूद इसके डंपिंग ग्राउंड के केमिकल की रासायनिक प्रक्रिया मनपा के मंसूबों पर पानी फेर रही हैं। आलम यह हैं कि डंपिंग ग्राउंड के आसपास बसी बस्तियों के हजारों लोग डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाले जहरीले धुंए से बीमार हो रहे हैं। जिसका सबसे ज्यादा असर छोटे बच्चे, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा हैं। इलाके के लोगों को आंखों की जलन, श्वास की तकलीफ, गले की खरास, पेट दर्द उल्टी, टायफाइड, खांसी, दमा और अस्थमा जैसी शिकायतें देखने को मिल रही हैं। मनपा ने इन प्रभावित क्षेत्रों का अभी तक कोई मेडिकल सर्वेक्षण नहीं किया है। इसके चलते आसपास झोलाछाप डॉक्टर बीमार लोगों से दवा के नाम पर मनमानी रकम वसूली कर रहे हैं।
मनपा क्षेत्र से 700 टन कचरा प्रतिदिन
वसई विरार शहर महानगर पालिका के इस डंपिंग ग्राउंड में प्रतिदिन करीब 150 ट्रकों और 200 छोटे वाहनों की फेरी से कचरा लाया जाता हैं। इस तरह से रोज करीब 700 टन कचरा डंपिंग ग्राउंड में जमा हो जाता हैं। वर्ष 2009 में वसई विरार शहर महानगर पालिका के स्थापना के पहले से भोएदा पाडा में कचरा डंपिंग किया जा रहा हैं। केवल वर्ष 2019 के आंकड़ों की माने तो अब तक दो लाख 40 हज़ार टन के करीब कचरा डंप किया जा चुका है। वहीं वर्ष 2009 से 2019 के आंकड़ों को देखें तो करीब 16 लाख टन से अधिक कचरा इस डंपिंग ग्राउंड में जमा किया जा चुका है।
खटाई में कचरा वर्गीकरण
मनपा ने घन कचरा व्यवस्थापन के तहत सूखा और गीला कचरा का वर्गीकरण कर इसे उठाने का फैसला किया है। इसके लिए मनपा ने सोसायटियों और सार्वजनिक जगहों पर हरे रंग का डिब्बे में गीला कचरा और सूखा कचरा के लिए नीले डिब्बे को वितरित किया है। पर इसका लाभ नहीं दिखता, डंपिंग ग्राउंड में दोनों कचरे को एक ही जगहों पर गिराया जा रहा हैं। जिसके चलते मनपा का कचरा वर्गीकरण करने का फैसला केवल सोसायटियों और सड़कों पर दिख रहा हैं।
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके
भोएदा पाडा के डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाले जहरीले धुंए से वालीव, सतिवाली, भोएदा पाडा, वाघराल पाडा, राजीवली, नाईक पाडा, मधुबन और गोखिवरे के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाला जहरीला धुंआ दिन-रात पूरे इलाके में कोहरे जैसा छाया रहता है। आसपास के इंडस्ट्री में जहरीले धुएं का प्रकोप इतना अधिक हो जाता हैं कि दिन में भी काम करना मुश्किल हो जाता हैं। डंपिंग ग्राउंड के जहरीले धुंए के कारण कई कंपनियों को दूसरी जगह पर जाना पड़ा है।
केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के नियम के मुताबिक डंपिंग ग्राउंड के इलाके में हवा की गुणवत्ता के जांच के सिस्टम लगाना जरूरी हैं। जिससे इलाके की गुणवत्ता की जानकारी हासिल किया जा सके। लेकिन महाराष्ट्र प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने वायु गुणवत्ता जांच की कोई मशीनें नहीं लगाई। वही मनपा का कचरे को डिकम्पोज करने की सभी प्रक्रिया अभी तक फाइलों में सीमित है।
मनपा प्रशासन तमाशबीन बना है
डंपिंग ग्राउंड पर सभी उपाय योजनाएं कागजों में चलाई जा रही हैं। डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाला केमिकल युक्त जहरीला धुआं नागरिकों का दम घोंट रहा है, जबकि मनपा प्रशासन तमाशबीन बना देख रहा है।
अनिल चव्हाण, शिवसेना उप तालुका प्रमुख
तैयार है प्रकल्प, शीघ्र लागू होगा
घन कचरा व्यवस्थापन के लिए राज्य सरकार की समितियों को समीक्षा के लिए भेज दिया हैं। एक समिति से मंजूरी मिल चुकी हैं, जबकि दूसरी समिति से मंजूरी मिलनी बाकी हैं। करीब 150 करोड़ रुपए घन कचरा व्यवस्थापन के लिए खर्च किया जाएगा। जिसके बाद हालातों में सुधार हो जाएगा।
महादेव जवादे, शहर अभियंता, वसई विरार शहर महानगर पालिका
Published on:
18 Dec 2019 06:19 pm
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