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‘राष्ट्रवादी एक ही है…मनमर्जी नहीं चलेगी’: NCP के दोनों गुटों के विलय पर सुप्रिया सुले का बड़ा बयान

NCP Sharad Pawar: सांसद सुप्रिया सुले ने एनसीपी के दोनों गुटों के एक साथ आने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी शरद पवार की है और सुप्रीम कोर्ट में अधिकार की लड़ाई जारी है।
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मुंबई

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Dinesh Dubey

Aug 30, 2026

Supriya Sule Statement NCP Merger

NCP विलय की अटकलों पर सुप्रिया सुले का बड़ा बयान (Photo: X/ARAVUkd)

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के एक साथ आने की चर्चा थमी नहीं है। अब NCP (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने इन अटकलों पर साफ शब्दों में पार्टी का रुख सामने रखा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी एक ही है और शरद पवार के साथ अन्याय हुआ है। पार्टी के नाम और अधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।

सुप्रिया सुले ने कहा कि NCP की स्थापना के समय शरद पवार संस्थापक अध्यक्ष और संस्थापक सदस्य थे। लेकिन गलत तरीके से पार्टी उनसे छीन ली गई। उन्होंने कहा कि पार्टी के संविधान को देखने पर स्पष्ट होता है कि शरद पवार के साथ अन्याय हुआ है और इसी अन्याय के खिलाफ देश की शीर्ष कोर्ट में लड़ाई जारी है।

‘पार्टी मिलने के बाद भविष्य का फैसला शरद पवार ही करेंगे’

एनसीपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि अधिकार और न्याय के आधार पर पार्टी शरद पवार को वापस मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश किसी की मर्जी से नहीं, बल्कि संविधान के आधार पर चलता है। उन्होंने आगे कहा कि यदि पार्टी शरद पवार को वापस मिलती है, तो उसके बाद पार्टी का क्या करना है, यह फैसला खुद शरद पवार करेंगे। पार्टी किसी को सौंपनी है या उसका नेतृत्व किसे देना है, यह भी पूरी तरह उनका अधिकार होगा।

‘सुप्रीम कोर्ट से जल्द तारीख की उम्मीद’

सुप्रिया सुले ने कहा कि वह यह लड़ाई इसलिए लड़ रही हैं क्योंकि जिस पार्टी की स्थापना शरद पवार ने की, उसे गलत तरीके से और पार्टी के संविधान के साथ छेड़छाड़ करके उनसे अलग कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सिर्फ पिता शरद पवार को न्याय दिलाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि भविष्य में किसी और के साथ इस तरह का अन्याय न हो।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर सुले ने जल्द तारीख मिलने की मांग की। उन्होंने अपनी बात समझाने के लिए संपत्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी के घर में कोई व्यक्ति गलत दस्तावेज दिखाकर अपना मालिकाना हक जताने लगे, तो क्या असली मालिक उसे स्वीकार करेगा? इसी तरह पार्टी के अधिकार का फैसला भी संविधान और कानून के आधार पर होना चाहिए।

‘चुने हुए सांसद-विधायक नहीं, पार्टी का संविधान और संगठन अहम’

पार्टी संविधान का हवाला देते हुए सुप्रिया सुले ने एक और अहम दावा किया। उन्होंने कहा कि एनसीपी के संविधान को देखें तो सिर्फ चुने हुए विधायक या सांसद किसके साथ हैं, इससे पार्टी किसकी यह तय नहीं होता। बल्कि जिलाध्यक्ष और पार्टी से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज भी महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी किसके पक्ष में है, यह ज्यादा मायने रखता है, न कि केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या।

बारामती से सांसद सुले ने कहा कि भले ही निर्वाचित प्रतिनिधियों की संख्या शरद पवार के खिलाफ चली गई हो, लेकिन पार्टी के संविधान व दस्तावेजों के आधार पर एनसीपी कल भी शरद पवार की थी, आज भी उनकी है और आगे भी वह कानूनी लड़ाई के जरिए उनकी ही होगी।

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