
'महाराष्ट्र की बाघिन' का दर्दनाक अंत (Photo: youtube grab)
Naldurg Fort Dharashiv incident: महाराष्ट्र के धाराशिव जिले से एक झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। निलंगा तालुका की रहने वाली 30 वर्षीय राष्ट्रीय स्तर की महिला पहलवान अश्विनी मनोहर पौल (30) अपने तीन छोटे बच्चों के साथ नलदुर्ग किले पर घूमने गई थीं, जहां से गिरने की वजह से अश्विनी और उनके साढ़े पांच साल के बेटे अजिंक्य की मौत हो गई। वहीं, ढाई साल की जुड़वां बेटियों में से क्रांति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। दूसरी बेटी वीरा गंभीर रूप से घायल है और धाराशिव के सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर पर उसका इलाज चल रहा है। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, लातूर जिले के निलंगा तालुका स्थित अंबुलगा गांव की रहने वाली महिला पहलवान अश्विनी पौल गुरुवार को अपने तीन बच्चों के साथ नलदुर्ग किला देखने गई थीं। लेकिन दोपहर के समय उनके बच्चों सहित किले के उपली बुर्ज से गिरने की खबर सामने आई।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सभी को अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, अश्विनी और उनके बेटे अजिंक्य को बचाया नहीं जा सका। गंभीर रूप से घायल क्रांति की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। उनकी जुड़वां बहन वीरा की हालत बेहद नाजुक है।
अश्विनी ने योजना बनाकर ऐसा किया या फिर उनके साथ कोई हादसा हुआ? फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। नलदुर्ग पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के पीछे पारिवारिक, व्यक्तिगत या कोई अन्य वजह तो नहीं थी। अश्विनी पिछले कुछ महीनों से अपने तीनों बच्चों के साथ मायके में रह रही थीं। उनके पिता शिक्षक हैं।
बताया जा रहा है कि अश्विनी मुंबई में नौकरी करती थीं। उनके पति मनोहर के कहने पर उन्होंने कुछ महीने पहले ही नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद वह पिछले करीब तीन महीनों से अपने बच्चों के साथ मायके में रह रही थीं। हालांकि, नौकरी छोड़ने और मायके में रहने के पीछे की परिस्थितियों को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
अश्विनी पौल राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाशाली महिला पहलवान थीं। कुश्ती के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई थी और उन्हें 'महाराष्ट्र की शेरनी' भी कहा जाता था। उनके परिवार का कुश्ती से गहरा रिश्ता रहा है। उनके पिता, भाई, मां और बहन भी कुश्ती से जुड़े रहे हैं। उनके पति मनोहर पौल भी पहलवान बताये जा रहे हैं।
अश्विनी को कुश्ती का शुरुआती प्रशिक्षण अपने परिवार से ही मिला। उनके पिता को कुश्ती का शौक था और बेटी की प्रतिभा को देखते हुए उन्होंने घर पर ही उसके अभ्यास के लिए प्रशिक्षण केंद्र तैयार किया था।
कम उम्र से ही कड़ी मेहनत करने वाली अश्विनी ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया और कई पदक अपने नाम किए। अश्विनी ने वर्ष 2007 में तिरुवनंतपुरम, केरल में आयोजित राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया था। इसके बाद वर्ष 2008 और 2009 में गुरदासपुर, पंजाब और चेन्नई में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीते। अपने कुश्ती करियर में उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कुल 5 स्वर्ण और 6 रजत पदक हासिल किए थे।
Updated on:
04 Sept 2026 11:19 am
Published on:
04 Sept 2026 11:17 am
