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खीर-पूरियां पर नियाज लगा मांगी दुआएं

शहरभर में हुआ आयोजन
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नागौर

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Mohummed Razaullah

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Updated: 11 Apr 2018, 11:24 AM IST

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नागौर. शहर में कूण्डों की नियाज मंगलवार को लगाई गई। इस मौके पर मुस्लिम समाज के लोगों के घरों में खीर-पूड़ी बनाकर न्याज दिलाई गई। मौलाना ईनायत उल्लाह ने बताया कि रजब महीने की 22 तारीख को हजरत सैयदना इमाम जाफर सादिक के नाम की निजाय दिलाई जाती है। घरों में पाक-साफ कूण्डों में खीर-पूरियां रखकर फातिहा लगाई गई। उन्होंने बताया कि कूण्डो की नियाज घरों में ही दिलाई जाती है। कुछ लोगों को तारीख का पता नहीं होने के आगे पिछे होने के चलते कई लोगों ने सोमवार को ही फातिहा लगावाकर नियाज दिलवा ली। मान्यता के अनुसार खीर पूरियों को बनाकर घरों में ही रखा जाता है। आस-पास के बच्चों तथा रिश्तेदारों को घरों पर जाकर बुलाया जाता है। त्योहार को लेकर दिल्ली दरवाजा, दड़ा मोहल्ला, न्यारो का मोहल्ला, लोहारपुरा, माही दरवाजा, नकाश दरवाजा सहित स्थानों पर चहल-पहल रही।
दिलाई फातिहा
बासनी. कस्बे में कूण्डों का त्यौहार मंगलवार को मनाया गया। ईमाम मौलाना नासिर अहमद ने बताया कि रजब महीने की 22 तारीख को कूण्डों की नियाज घरों में दिलाई जाती है। इसके तहत सैयदना ईमाम जाफ र सादिक के नाम की फातिहा हुई। मौलाना नासिर ने बताया कि जो कोई सच्चे दिल से फातिहा दिलाता है उसकी दुआ कबूल होती है।

चढ़ाई चादर
वहीं माही दरवाजा राठौड़ी कुआं स्थित हजरत सूफी हमीदुद्दीन रेहानी का उर्स मंगलवार को धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सुबह फज्र के बाद कुरान ख्वानी हुई। अस्र की नमाज के बाद देग बांटी गई। रात को इशा की नमाज के बाद तकरीरी कार्यक्रम में उलमाएं कराम ने नबी के बताए रास्ते पर चलने की सीख दी। इस दौरान चादर का जुलूस मुल्तानी चौक से रवाना हुआ जो विभिन्न मार्गों से होता हुआ दरगाह पहुंचा जहां पर चादर चढ़ा फूल पेश करते हुए दुआ की।
जलसे का आयोजन
वहीं अजमेरी गेट के बाहर ग्रामोत्थान स्कूल के सामने सोमवार देर रात मौलाना इमरान अशफाकी की देखरेख में गौसुलवरा कान्फ्रेंस हुई। मुख्य मौलाना अबुबकर ने लोगों को इस्लामी व नेक रास्ते पर चलते हुए जिदंगी गुजारने की सीख दी। अकारी सगीर अहमद, मौलाना मोहम्मद हुसैन, मौलाना शौकत खान ने भी तकरीर की। इस दौरान नूर मोहम्मद गौरी, मोहम्मद हनीफ गौरी, मोहम्मद शरीफ, मोहम्मद आरिफ, मोहम्मद इरफान सहित गुलशन रजा ए युवा कमेटी के लोगों ने व्यवस्थाएं संभाली। इस दौरान बड़ी संख्या में पुरूष महिलाएं व बच्चे मौजूद रहे।