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VIDEO…रामदेव पशु मेला में गुड्स ट्रेन नहीं चलने से दो साल में ही नुकसान का आंकड़ा 20 करोड़ पार

-पशु मेला में प्रति पशु प्राइवेट वाहनों से परिवहन करने पर पालकों को 70-80 हजार की राशि करनी पड़ रही वाहन, राह खर्च अलग से देना पड़ता है
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Nagaur news

Due to goods train not running in Ramdev Cattle Fair, loss figure crossed Rs 20 crore in two years

-गुड्स ट्रेन का संचालन होने पर पशु पालकों को प्राइवेट वाहनों की अपेक्षा पांच गुना राशि कम करनी पड़ेगी व्यय
-संचालन शुरू हुआ तो फिर मेले में आने वाले पशु पालकों की तादाद बढ़ जाएगी तीन से चार गुना
नागौर. रामदेव पशु मेला में गुड़्स ट्रेन नहीं चलने से पशुपालकों को अत्याधिक आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि ट्रेन संचालन शुरू कराने के लिए गत चार से पांच सालों में अथक प्रयास किए गए, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पाई है। पिछले वर्ष भी ट्रेन संचालन की अनुमति दिए जाने के रेलवे की ओर से संकेत तो मिले थे, लेकिन ऐन मौके पर पता चला कि ट्रेन नहीं आएगी। जानकारों की माने तो इसकी वजह से पशु पालकों को अपने पशुओं को प्राइवेट वाहनों के माध्यम से परिवहन करने की स्थिति में केवल दो साल में ही 20 करोड़ से ज्यादा की राशि का नुकसान उठाना पड़ा था। जानकारों के इस बार भी ऐसा न हो, इसके लिए जिला अध्यक्ष भारतीय किसान टिकैत यूनियन अर्जुनराम लोमरोड ने भी संपर्क कर पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक से आवश्यक कदम उठाए जाने के लिए कहा है। ताकि यथासमय ट्रेनों का संचालन होने पर पशु मेला को फायदा हो सके। जानकारों का कहना है कि टे्रनों से पशु परिहवन की अनुमति नहीं मिलने की वजह से पशुपालकों को 20 करोड़ से ज्यादा का तो नुकसान उठाना पड़ा
परिवहन सुविधा नहीं मिलने से पशु पालकों की मेले से बढ़ी दूरी
रामदेव पशु मेला में गुड्स ट्रेन का संचालन नहीं होने की वजह से इस पर प्रतिकूल असर पड़ा है। पशुओं के लिए परिवहन की सुविधा नहीं होने के की वजह से पशु पालकों की रामदेव पशु मेला से दूरी बढऩे लगी है। यह दूरी प्रतिवर्ष बढ़ती चली जा रही है। बताते हैं कि पशुओं को परमिट के साथ ले जाने के लिए तमाम कानूनी औपचारिकताओं की पालना करनी पड़ती है। यह सारी औपचारिकताएं प्राइवेट वाहनों से परिवहन करने की स्थिति में नहीं पूरी की जा सकती है। ऐसे में ट्रेन का संचालन यदि शुरू हुआ तो फिर प्रदेश के पशुपालकों को फायदा होने के साथ ही रामदेव पशु मेला को भी संजीवनी मिल जाएगी।
प्रति पशुपालक इतना हो रहा नुकसान
बताते हैं कि प्राइवेट वाहनों से पशुओं का गंतव्यों तक परिवहन करने में प्रति पशु तकरीबन पांच से छह गुना ज्यादा किराया अदा करना पड़ रहा है। इसको इस तरह से समझा जा सकता है कि यदि ट्रेन में प्रति बोगी पशुपालक को ज्यादा से ज्यादा 20-22 हजार व्यय पड़ेगा, जबकि यही प्राइवेट वाहन से केवल एक पशु का परिवहन करने में ही उसे 60-70 हजार रुपए का व्यय करना पड़ता है। इसमें राह खर्च जोड़ लिया जाए तो उसे इसका व्यय तकरीबन एक लाख रुपए करना पड़ जाता है। जबकि ट्रेन से परिवहन करने की स्थिति में राह खर्च के साथ प्रति पशु किराए की दर औसतन पांच गुना रियायती दर पर चले जाएंगे। मेले में आने वाला पालक अपने साथ चार से पांच या कम से कम दो पशु खरीदकर जरूर ले जाते हैं। इस तरह से प्रति पशु परिवहन करने में पालकों को कितना नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसका अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।
दो साल में दो हजार से ज्यादा पशु गए थे बाहर
रामदेव पशु मेला में वर्ष 2022 में कुल 882 पशु राज्य से बाहर गए थे। इसमें 784 गोवंश, 11 भैंस वंश एवं 87 अश्व वंश शामिल थे। वर्ष 2023 में राज्य के बाहर जाने वालों में 1141 गोवंश एवं 16 भैंस वंश शामिल थे। इन पशुओं का परिवहन पशुपालकों ने प्राइवेट वाहनेां के माध्यम से किया था। इससे प्रति पशु राह खर्च के साथ ही वाहन व्यय आदि शामिल करने पर लगभग एक लाख रुपए के हिसाब से आकलन में जोड़े जाने पर महज दो मेले में ही पशु पालकों को 20 करोड़ से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ा। पशुपालकों का कहना है कि यदि सरकार अनुमति दे दे तो पशु मेला को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही उनको लगने वाला आर्थिक घाटा पर भी लगाम लग जाएगी।
इनका कहना है...
गुड्स ट्रेन संचालन के लिए पशु पालन विभाग की ओर से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इस संबंध में जिला कलक्टर के साथ चर्चा कर इस कार्य में तेजी लाई जाएगी। ताकि पशु पालकों को इसका फायदा मिल सके।
डॉ. महेश कुमार मीणा, संयुक्त निदेशक पशुपालन नागौर
परिवहन सुविधा नहीं मिलने से पशुपालकों की मेले से बढ़ी दूरी
पशु मेला में से पशुओं के परिवहन के लिए गुड्स ट्रेन का संचालन शुरू कराने के लिए पशु पालन विभाग को अभी से ही प्रयास शुरू कर देना चाहिए। प्रयास रंग लाए तो पशुपालकों को न केवल चार से पांच गुना कम व्यय पर ही पशुओं के परिहवन की सुविधा मिल जाएगी, बल्कि रामदेव पशु मेला के प्रति पशुपालकों का क्रेज भी बढ़ेगा।
अर्जुनराम लोमरोड, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान टिकैत यूनियन नागौर