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नागौर: मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद बिगड़ी 5 मरीजों की तबीयत, आंखों में जलन और धुंधलेपन की शिकायत; जयपुर रेफर

कुचामन सिटी के राजकीय चिकित्सालय में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद पांच मरीजों ने आंखों में धुंधलापन और असहजता की शिकायत की। अस्पताल प्रशासन ने प्राथमिक उपचार के बाद सभी मरीजों को बेहतर जांच व इलाज के लिए जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर किया।
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नागौर

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Arvind Rao

Jul 30, 2026

Kuchaman city News

अस्पताल में भर्ती मरीज (फोटो सोशल मीडिया)

कुचामनसिटी (नागौर): राजकीय चिकित्सालय के नेत्र विभाग में मंगलवार को हुए सात नेत्र ऑपरेशनों के बाद बुधवार को पांच मरीजों ने आंखों में धुंधलापन और असहजता की शिकायत की। अस्पताल प्रशासन ने सभी को विशेषज्ञ उपचार के लिए जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर कर दिया।

बता दें कि मंगलवार को सात मरीजों के मोतियाबिंद सहित अन्य नेत्र संबंधी ऑपरेशन किए गए थे। बुधवार सुबह पट्टियां खोलने पर पांच मरीजों ने धुंधला दिखाई देने, जलन और असहजता की शिकायत की। इसके बाद चिकित्सकों ने उनकी जांच कर वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी।

जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

चिकित्सकों के अनुसार, मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद शुरू में कुछ मरीजों को अस्थायी रूप से धुंधलापन या असहजता महसूस हो सकती है। हालांकि, वास्तविक स्थिति विशेषज्ञ जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। कार्यवाहक पीएमओ डॉ. प्रहलाद बाजिया ने बताया कि एहतियात के तौर पर मरीजों को एसएमएस अस्पताल रेफर किया गया है, जहां नेत्र रोग विशेषज्ञ उनकी जांच कर रहे हैं।

मरीजों का इलाज शुरू

एसएमएस अस्पताल प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित मरीजों में घासीराम (65), हीराराम (73), गोकुल (70), मीरा देवी (68) और नारायणी (67) शामिल हैं। ये सभी मरीज बुधवार रात करीब 9:30 बजे एसएमएस अस्पताल पहुंचे। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए देर रात ही सीनियर डॉक्टरों का एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित कर तुरंत इलाज शुरू करवाया।

विशेषज्ञ डॉक्टरों का बोर्ड गठित

इलाज और मॉनिटरिंग के लिए नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नगेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में बोर्ड बनाया गया है। इसमें मेडिसिन एचओडी डॉ. महेंद्र अग्रवाल तथा नेत्र रोग विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. मनीष शर्मा और डॉ. पंकज शर्मा को शामिल किया गया है।

डॉ. नगेंद्र सिंह के अनुसार, सभी मरीजों का स्टैंडर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत उपचार जारी है। हालांकि, मरीजों की स्थिति अभी गंभीर बनी हुई है। लेकिन मेडिकल टीम की पूरी कोशिश है कि मरीजों की आंखों को सुरक्षित रखते हुए उनकी रोशनी बचाई जा सके।