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Rajasthan Panchayat Election: जीत की अफवाह पर निकाला विजयी जुलूस- नतीजे में मिली हार, सरपंच चुनाव का अजीबोगरीब वाकया

Sarpanch Chunav Result 2026: नागौर के माडपुरा में सरपंच चुनाव का अनोखा वाकया। जीत की अफवाह पर 3 घंटे पहले ही समर्थकों ने निकाल दिया जुलूस, रात ढाई बजे नतीजे आए तो 169 वोटों से हार गईं मगी देवी।
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नागौर

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Nakul Devarshi

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Updated: 26 Oct 2026, 10:50 AM IST

nagaur madpura sarpanch election victory procession rumor false win

अफवाह पर जीत का जश्न मनाते मगी देवी के पति मोहब्बत राम और समर्थक

राजस्थान में जारी पंचायती राज चुनाव 2026 के परिणामों के बीच नागौर जिले के माडपुरा गांव से एक दिलचस्प और अजब-गजब वाकया सामने आया है। ग्रामीण राजनीति में हार-जीत के पल-पल बदलते समीकरणों और नतीजों के बीच फैली एक अफवाह ने ऐसा रंग जमाया कि आधिकारिक नतीजे घोषित होने से पूरे तीन घंटे पहले ही एक प्रत्याशी के समर्थकों ने जीत की खुशी में नाचना-गाना शुरू कर दिया। बिना कोई आधिकारिक पुष्टि या चुनाव अधिकारी का सर्टिफिकेट मिले ही ढोल-नगाड़ों की थाप पर प्रत्याशी को साफा पहनाकर गांव की गलियों में विजयी जुलूस तक निकाल दिया गया। हालांकि, देर रात जब चुनाव अधिकारी ने अंतिम आंकड़ों की घोषणा की तो पूरा माहौल अचानक मायूसी में तब्दील हो गया।

24 अक्टूबर 2026 की देर रात तक चली मतगणना के दौरान माडपुरा गांव में घटे इस घटनाक्रम की चर्चा अब पूरे नागौर जिले सहित आसपास के इलाकों में जोरों पर है। लोग सोशल मीडिया पर भी इस अनोखे घटनाक्रम की चर्चा कर रहे हैं कि कैसे ढोल-धमाकों के साथ मनाया गया जश्न आधिकारिक नतीजे आते ही एक झटके में फीका पड़ गया।

जानिए आधी रात को कैसे फैली जीत की अफवाह?

घटनाक्रम के अनुसार, माडपुरा ग्राम पंचायत में सरपंच पद के चुनाव के लिए मतदान संपन्न होने के बाद देर रात स्थानीय केंद्र पर मतपत्रों की गिनती चल रही थी। रात करीब 11:30 बजे मतगणना केंद्र के बाहर खड़े लोगों और समर्थकों के बीच अचानक यह अफवाह तेजी से फैल गई कि महिला प्रत्याशी मगी देवी प्रजापत चुनाव जीत चुकी हैं।

बिना किसी आधिकारिक घोषणा का इंतजार किए और बिना रिटर्निंग ऑफिसर से पुष्टि किए, अति-उत्साही समर्थकों ने मान लिया कि मगी देवी ने मैदान मार लिया है। इसके बाद मतगणना केंद्र के बाहर ही समर्थकों ने नारे लगाने शुरू कर दिए और तुरंत जश्न की तैयारियां शुरू हो गईं।

साफा पहनाया, मालाएं लादीं और ढोल-धमाकों के साथ निकला जुलूस

अफवाह पर पूरी तरह यकीन कर चुके समर्थकों का उत्साह देखते ही बन रहा था। समर्थकों ने आनन-फानन में मगी देवी और उनके प्रतिनिधियों को साफा पहनाया, फूलों की बड़ी-बड़ी मालाएं पहनाईं और ढोल-नगाड़े बुलवा लिए। आधी रात को ही गांव की मुख्य गलियों में पटाखे फोड़े गए और ढोल की थाप पर विजयी जुलूस निकाला गया।

करीब दो से तीन घंटे तक माडपुरा गांव में जीत का यह जश्न पूरे जोरों-शोरों से चलता रहा। मगी देवी के समर्थक एक-दूसरे को बधाइयां दे रहे थे और मिठाइयां बांटी जा रही थीं। पूरे गांव को लगा कि नए सरपंच का फैसला हो चुका है, लेकिन असली कहानी तो अभी बाकी थी।

रात 2:30 बजे आया असली परिणाम, 169 वोटों से जीत गईं रूपी बाई

जब रात को करीब 2:30 बजे मतगणना प्रक्रिया पूरी तरह संपन्न हुई और रिटर्निंग ऑफिसर ने आधिकारिक चुनाव परिणाम के आंकड़ों की घोषणा की, तो जश्न मना रहे समर्थकों के होश उड़ गए। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मगी देवी चुनाव जीती ही नहीं थीं।

वास्तविक चुनाव परिणाम में प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी रूपी बाई को कुल 1581 वोट मिले, जबकि मगी देवी के खाते में 1412 वोट ही आ सके। इस तरह रूपी बाई ने मगी देवी को 169 वोटों के स्पष्ट अंतर से शिकस्त देकर सरपंच पद पर जीत दर्ज कर ली।

जश्न की जगह छाया सन्नाटा, सोशल मीडिया पर चर्चा में माडपुरा का वाकया

आधिकारिक नतीजे की घोषणा सुनते ही कुछ ही मिनट पहले ढोल-नगाड़े बजा रहे समर्थकों में सन्नाटा छा गया। जो समर्थक मालाएं पहनाकर मिठाइयां बांट रहे थे, वे अचानक चुपचाप वहां से खिसकने लगे। जीत का जो माहौल पिछले तीन घंटे से बना हुआ था, वह अचानक भारी निराशा और सन्नाटे में बदल गया। वहीं दूसरी ओर, असली विजेता रूपी बाई के समर्थकों ने घोषणा के बाद सादगी से अपनी जीत का जश्न मनाया।

नागौर जिले के माडपुरा का यह अजब-गजब वाकया अब पूरे प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में एक बड़ा सबक और चर्चा का विषय बन गया है। चुनावी विश्लेषकों और स्थानीय प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि जब तक चुनाव अधिकारी आधिकारिक रूप से परिणाम का प्रमाण पत्र जारी न कर दे, तब तक अफवाहों के आधार पर कोई भी कदम उठाना भारी पड़ सकता है।