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डेढ़ दर्जन थाना प्रभारी का छूटेगा जिला

-पांच इंस्पेक्टर और बीस सब इंस्पेक्टर से मांगे दो-दो विकल्प, कोई तीन तो कोई सात साल से यहीं है तैनातब्लर्ब: करीब छह महीने बाद विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में तीन बरस से अधिक समय से यहां जमे इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर का जिला बदलने वाला है। इनसे नई पोस्टिंग के लिए दो विकल्प मांगे हैं। नए खुलने वाले पांच थानों के लिए भी कवायद जोरों पर है।
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दूसरे जिले में स्थानांतरित होंगे।

आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जिले के पांच इंस्पेक्टर और 25 सब इंस्पेक्टर जल्द ही दूसरे जिले में स्थानांतरित होंगे। इनमें करीब डेढ़ दर्जन थाना प्रभारी हैं। कुचेरा और पादूकलां थाने में तैनात महिला थाना प्रभारी भी इसी सूची में शामिल हैं।

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

नागौर. आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए जिले के पांच इंस्पेक्टर और 25 सब इंस्पेक्टर जल्द ही दूसरे जिले में स्थानांतरित होंगे। इनमें करीब डेढ़ दर्जन थाना प्रभारी हैं। कुचेरा और पादूकलां थाने में तैनात महिला थाना प्रभारी भी इसी सूची में शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार इन सभी को जिले में रहते हुए तीन बरस से अधिक का समय हो चुका है। कोतवाली, नावां और सदर थाना प्रभारी के साथ पुलिस लाइन में तैनात हरिराम जाखड़ और रामवीर जाखड़ पुलिस निरीक्षक (इंस्पेक्टर ) इसमें शामिल हैं , जबकि जिले से स्थानांतरित होने वालों में बीस सब इंस्पेक्टर है। नागौर से रेंज के तहत अन्यत्र स्थानांतरण के संबंध में इन सबसे दो विकल्प मांगे हैं।

सूत्र बताते हैं कि थाना प्रभारियों को लेकर खालीपन नागौर जिले का नसीब बन गई है। डीडवाना व नावां में नया महिला थाना तो बूडसू, निम्बीजोधा और सुद्रासन में थाना खोले जा रहे हैं जो नए जिले कुचामन-डीडवाना में आते हैं। ये खुलने जा रहे हैं। एसपी राममूर्ति जोशी ने हाल ही यहां का निरीक्षण कर उपयुक्त स्थान के साथ अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इन नए थानों में भी स्टाफ लगाया जा रहा है। बताया जाता है कि बूडसू और निम्बी जोधा को अभी नजदकी चौकी में शिफ्ट किया जा रहा है।

लम्बे समय से किल्लत बरकरार

सूत्रों का कहना है कि जांच का दारोमदार संभालने वाले एएसआई (सहायक उप निरीक्षक) पूरे जिले में बारह-तेरह प्रतिशत हैं। यही नहीं सीआई, एसआई और हैड कांस्टेबलों की किल्लत ने भी अनुसंधान में कोढ़ में खाज वाली कहावत को चरितार्थ कर दिया है। करीब सत्तर फीसदी अनुसंधान करने वाले ही नहीं होंगे तो काम कैसे चलेगा। और तो और याचिका पर फिलहाल फैसले के बाद विभाग का मूड तय नहीं हो पाया है, ऐसे में पदोन्नति तो रुकी ही है, कांस्टेबल भर्ती पर भी पेंच फंसा हुआ है।

ऐसे में कैसे हो पाएगी पूर्ति

पांच नए थाने खुल रहे हैं तो पहले ही अस्सी फीसदी पद एएसआई के खाली पड़े हैं। जिले में सौ से अधिक पद हैड कांस्टेबल तो करीब चालीस पद एसआई के रिक्त पड़े हैं। ऐसे में जब छह-सात साल से रिक्त पड़े पदों पर भर्ती नहीं हो रही तो नए थानों के बाद भी क्या पुलिस बेड़े की किल्लत दूर हो पाएगी।

इसलिए भी पड़ते हैं कम

बताया जाता है कि जिले के अधिकांश थानों में नफरी काफी कम है। इसके अलावा अधिकतर पुलिसकर्मी अन्य कामों में उलझे रहते हैं। धरना-प्रदर्शन के अलावा वीआईपी ड्यूटी के साथ गुमशुदा अथवा बदमाश की तलाशी में कई पुलिसकर्मी तो आमतौर पर बिजी ही रहते हैं। ऐसे में पहले से ही कम चल रहे पुलिसकर्मी और कम हो जाते हैं।