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नागौर

नया भवन खाली कर पुराना अस्पताल भवन में शिफ्ट होगी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग

आखिर निकल गया एमसीएच विंग की शिफ्टिंग का मुहूर्त, जानिए क्यों करना पड़ रहा है नया भवन खाली
– 19 जून को होगी शिफ्टिंग, तैयारियां पूरी

नागौरJun 15, 2024 / 03:58 pm

shyam choudhary

Old hospital nagaur
नागौर. डर के साये में जी रहे जेएलएन अस्पताल की एमसीएच विंग के डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ के साथ मरीजों को अब जल्द ही राहत मिलने वाली है। जेएलएन अस्पताल के पीएमओ डॉ. महेश पंवार ने कार्यालय आदेश निकालकर एमसीएच विंग को 19 जून को पुराना अस्पताल भवन में शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। पीएमओ के अनुसार 19 जून से जेएलएन अस्पताल के मातृ-शिशु स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सभी सेवाएं पुराने अस्पताल भवन में संचालित होंगी। उन्होंने 19 जून से मातृ-शिशु स्वास्थ्य विभाग के संबंधित सभी चिकित्सकों एवं कार्मिकों को अपनी उपस्थिति पुराने अस्पताल में प्रभारी डॉ. गुलाबसिंह को देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पीएमओ ने यह भी कहा है कि शिफ्टिंग कार्य के दौरान दो दिन तक दो कार्मिक अपने वर्तमान कार्यस्थल पर मरीजों की संख्या एवं उनके हित को देखते हुए कार्यरत रहेंगे। जिनकी सेवाएं वर्तमान स्थल पर आवश्यक है, लेकिन आगामी कार्यदिवसों में सम्पूर्ण शिफ्टिंग होने पर वे भी अपनी उपस्थिति पुराने अस्पताल भवन में देंगे।
गौरतलब है कि नागौर जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल परिसर में करोड़ों रुपए खर्च कर कुछ वर्ष पूर्व बनाए गए एमसीएच विंग के भवन को चिकित्सा विभाग ने जोधपुर के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की जांच रिपोर्ट के बाद कंडम मान लिया था। इसीलिए एनएचएम के एमडी ने साढ़े छह महीने पहले यानी एक दिसम्बर 2023 को भवन को खाली करके एमसीएच विंग को पुराना अस्पताल में शिफ्ट करने के आदेश दिए थे, ताकि कोई हादसा नहीं हो। भवन निर्माण की गुणवत्ता खराब होने पर तत्कालीन जिला कलक्टर के निर्देश पर एसीबी ने एमसीएच विंग भवन के नमूने लेकर 2 नवम्बर 2017 को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग नागौर कार्यालय के अधिशासी अभियंता के खिलाफ परिवाद दर्ज किया गया था।
शुरू से विवादों में रहा भवन

जेएलएन अस्पताल में बनाया गया मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई का भवन घटिया निर्माण को लेकर शुरू से ही विवादों में रहा। जेएलएन अस्पताल के तत्कालीन पीएमओ को मई 2017 में हैंडओवर तो कर दिया। इसके बाद घटिया निर्माण का मामला उठा तो तत्कालीन जिला कलक्टर कुमारपाल गौतम ने एसीबी जांच के निर्देश दिए, जिस पर एसीबी ने अस्पताल पहुंचकर निर्माण सामग्री के नमूने लिए, लेकिन ठेकेदार व अधिकारियों के रसूखात के चलते आज तक एसीबी में मामला प्रक्रियाधीन है। जब भी कार्रवाई का मुद्दा उठा तो उसे दबा दिया गया। साथ ही मरम्मत के नाम पर बार-बार लाखों रुपए बर्बाद किए गए, ताकि भ्रष्टाचार को ढंका जा सके।

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