
तेंदुए की खाल तस्करी का भंडाफोड़ (photo source- Patrika)
Leopard Skin Seized: नारायणपुर में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। धौड़ाई रेंज के गायातापारा मार्ग के पास गश्त के दौरान वन विभाग की टीम ने तीन संदिग्धों को पकड़ा। तलाशी लेने पर उनके पास से तेंदुए की एक पूरी तरह सुरक्षित खाल बरामद हुई। आरोपी दो मोटरसाइकिलों से खाल ले जाने की कोशिश कर रहे थे। दोनों बाइक को भी वन विभाग ने जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई वन मंत्री केदार कश्यप के वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी के खिलाफ दिए गए निर्देशों के तहत की गई है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वन्यजीव अपराधों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, 8 अगस्त को वन विभाग की टीम धौड़ाई रेंज में नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान गायातापारा मार्ग के पास तीन संदिग्ध लोग नजर आए। उनकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर गश्ती दल ने उन्हें रोककर तलाशी ली। तलाशी के दौरान उनके पास से तेंदुए की खाल मिली। आरोपी इसे दो मोटरसाइकिलों के जरिए ले जाने की कोशिश कर रहे थे। वन विभाग ने तस्करी में इस्तेमाल दोनों बाइक को भी जब्त कर लिया। जब्त बाइक के नंबर CG-21/J-4096 और CG-21/J-0920 बताए गए हैं।
वन विभाग के अनुसार, बरामद तेंदुए की खाल पूरी तरह सुरक्षित हालत में थी। इसकी कुल लंबाई 184 सेंटीमीटर बताई गई है। खाल की आगे के पैरों की तरफ चौड़ाई 125 सेंटीमीटर, पिछले पैरों की तरफ 118 सेंटीमीटर और पेट की चौड़ाई 55 सेंटीमीटर है। वन विभाग के मुताबिक, खाल के आकार से इसके वयस्क तेंदुए की होने की बात सामने आई है।
वन विभाग ने मौके से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सोनूराम काचलाम, उम्र 39 वर्ष, और पुनीत कुमार बघेल, उम्र 32 वर्ष, दोनों निवासी छोटेडोंगर के रूप में हुई है। तीसरा आरोपी जमधर पोताई, उम्र 50 वर्ष, धौड़ाई का रहने वाला बताया गया है। तीनों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें धारा 9, 11, 39, 40(2), 44, 48(ए), 49(ए), 49(बी), 50 और 51 शामिल हैं।
कार्रवाई के बाद वन विभाग ने तीनों आरोपियों को नारायणपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट यानी CJM के सामने पेश किया। कोर्ट ने आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वन विभाग के अनुसार, अगर मामले में आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपियों को अधिकतम सात साल तक की सजा हो सकती है।
अब वन विभाग इस मामले की आगे की कड़ियां तलाशने में जुट गया है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तेंदुए की खाल आरोपियों के पास कहां से आई और इसे आगे कहां ले जाया जा रहा था। इसके साथ ही इस कथित तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन्यजीव अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई की जा रही है। जंगल और आसपास के इलाकों में गश्त और निगरानी बढ़ाई गई है। विभाग का कहना है कि अवैध शिकार और वन्यजीवों की तस्करी रोकने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।
Updated on:
11 Aug 2026 05:12 pm
Published on:
11 Aug 2026 05:12 pm
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