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Patrika Explainer: अग्निवीरों को 2 साल का एक्सटेंशन क्यों? सरकार ने बदले अग्निपथ के नियम, जानिए क्या होगा फायदा

Agniveer Scheme New Rules: अग्निपथ योजना में केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब अग्निवीर चार साल की सेवा के बाद दो साल और सेना में काम कर सकेंगे। जानिए नए नियम, बढ़ी हुई सैलरी, सेवा निधि और नियमित सैनिक बनने के नए अवसरों से जुड़ी पूरी जानकारी।
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भारत

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Ashib Khan

•

Updated: 5 Nov 2026, 12:55 PM IST

Agnipath Scheme Changes

अग्निपथ योजना में केंद्र सरकार ने किया बड़ा बदलाव (Photo-IANS)

Agniveer Scheme: दीपावली से ठीक पहले बुधवार को केंद्र सरकार ने अग्निवीरों को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने अग्निपथ योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब अग्निवीर चार साल की सेवा पूरी होने के बाद दो साल और सेना में काम कर सकते है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए यह जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अग्निवीरों के लिए दो साल की अतिरिक्त सेवा का रास्ता तैयार किया है। इसके बाद इच्छुक अग्निवीरों को भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

बता दें कि यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले बैच के करीब 24 हजार का चार साल का कार्यकाल पूरा होने वाला था। योजना के अनुसार, इनमें से 25 फीसदी यानी करीब 6,100 अग्निवीरों को ही नियमित सैनिक के रूप में सेना में बनाए रखा जाना था। बाकी 75 फीसदी यानी करीब 18,300 अग्निवीरों को सेवा से बाहर होना था।

लेकिन अब योजना में बड़े बदलाव के बाद इन 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल और (Agniveer Two Year Extension) सेना में काम करने का अतिरिक्त मौका मिलेगा। इसके बाद उन्हें सेना में नियमित होने का भी अवसर मिलेगा।

दरअसल, पहले बैच के नौसेना के अग्निवीर 21 नवंबर, वायुसेना के 25 दिसंबर और थलसेना के 31 दिसंबर को अपनी चार साल की सेवा पूरी करने वाले थे। ऐसे में केंद्र सरकार के अग्निपथ योजना मे बदलाव से अग्निवीरों को बड़ी राहत मिली है। 

क्या है सरकार का नया फैसला?

सरकार ने अग्निपथ योजना को 14 जून 2022 को शुरू किया था। सरकार ने उस समय उस समय तय किया था कि अग्निवीरों के प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन किया जाएगा और समय-समय पर योजना की समीक्षा होगी। 

वहीं अब बदलाव के बाद अग्निपथ योजना के तहत पहले की तरह 25 फीसदी अग्निवीरों को चार साल की सेवा के बाद नियमित सैनिक के रूप में भर्ती करने का प्रावधान जारी रहेगा। बदलाव बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों के लिए किया गया है।

इन 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त कार्य करने का मौका मिलेगा। इसके अलावा दो साल और काम करने के बाद उन्हें सेना में नियमित सैनिक बनने का भी अवसर मिलेगा।

हालांकि, नियमित सेवा में शामिल होना अपने आप में तय नहीं होगा। इसके लिए अग्निवीरों की इच्छा और संबंधित सेना की ओर से निर्धारित चयन प्रक्रिया और मानकों को पूरा करना जरूरी होगा।

इस व्यवस्था के तहत पहले चरण में मेरिट के आधार पर चुने गए 25 फीसदी अग्निवीरों की वरिष्ठता सबसे अधिक होगी। दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल पूरा करने वाले अन्य अग्निवीरों को भी वरिष्ठता मिलेगी, लेकिन उनकी वरिष्ठता पहले से नियमित किए गए 25 फीसदी अग्निवीरों से कम होगी।

अग्निपथ योजना में सरकार के नए बदलाव

मुख्य बिंदुपहले का प्रावधाननया बदलाव
सेवा अवधि4 साल75% अग्निवीरों को 2 साल अतिरिक्त सेवा
नियमित भर्ती25% अग्निवीर25% का प्रावधान जारी
अतिरिक्त अवसर75% को 4 साल बाद बाहर होना था2 साल अतिरिक्त सेवा का मौका
नियमित सैनिक बनने का मौका25% तक सीमितअतिरिक्त सेवा के बाद भी चयन का अवसर
चयन प्रक्रियामेरिट और प्रदर्शन के आधार परचयन प्रक्रिया और मानक लागू रहेंगे
वरिष्ठतापहले चयनित 25% सबसे वरिष्ठअतिरिक्त सेवा वाले अग्निवीरों की वरिष्ठता उनसे कम होगी

दो साल अतिरिक्त सेवा में कितना मिलेगा वेतन?

वहीं केंद्र सरकार ने अतिरिक्त दो साल की सेवा के दौरान अग्निवीरों के वेतन और सेवा निधि में भी बढ़ोतरी का प्रावधान किया है। सीडीएस एनएस राजा सुब्रमणि के मुताबिक, अतिरिक्त सेवा के पहले साल में अग्निवीरों को 43,500 रुपये और दूसरे साल में 47,500 रुपये का वेतन दिया जाएगा।

इसके अलावा सेवा निधि में सरकार का योगदान भी बढ़ाया जाएगा। पहले सरकार अग्निवीर के व्यक्तिगत योगदान का 30 फीसदी अपनी ओर से देती थी। अब अतिरिक्त दो साल की सेवा के दौरान सरकार का योगदान बढ़ाकर 70 फीसदी कर दिया जाएगा। इसके साथ वरिष्ठता से जुड़े अन्य लाभ भी दिए जाएंगे।

आखिर अग्निपथ योजना की जरूरत क्यों पड़ी?

14 जून 2022 को अग्निपथ योजना की शुरुआत होने के बाद तीनों सेनाओं में अग्निवीरों की भर्ती शुरू हुई। योजना के तहत 17.5 से 21 साल की उम्र के युवाओं को थलसेना, नौसेना और वायुसेना में गैर-अधिकारी पदों पर भर्ती करने का प्रावधान किया गया।

भर्ती साल में दो बार होती है। कोविड महामारी के कारण भर्ती प्रक्रिया में रुकावट आई। इसके बाद सरकार ने साल 2022 की भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा में एक बार की छूट देते हुए इसे 23 साल कर दिया था।

योजना के तहत अग्निवीरों को चार साल के लिए सेना में रखा जाता है। इसमें करीब छह महीने का प्रशिक्षण और साढ़े तीन साल की वास्तविक सैन्य सेवा शामिल है।

चार साल बाद 25 फीसदी अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल किया जाता है। बाकी 75 फीसदी को सेवा निधि पैकेज देकर विदा करने का प्रावधान था। इस पैकेज में अग्निवीर का अपना योगदान और सरकार की ओर से दिया गया योगदान शामिल होता है। मूल व्यवस्था के तहत उन्हें करीब 11 लाख रुपये की एकमुश्त राशि मिलनी थी।

सरकार का उद्देश्य सेना की औसत उम्र कम करना, सैन्य बलों को युवा बनाना और वेतन तथा पेंशन पर होने वाले खर्च को नियंत्रित करना था। पहले साल में 46 हजार अग्निवीरों की भर्ती का लक्ष्य रखा गया था। आगे हर साल 45 से 50 हजार युवाओं की भर्ती करने की योजना थी।

अग्निपथ योजना की प्रमुख विशेषताएं

बिंदुजानकारी
योजना की शुरुआत14 जून 2022
भर्ती की आयु सीमा17.5 से 21 साल
2022 में विशेष छूटअधिकतम आयु 23 साल
सेवा अवधि4 साल
प्रशिक्षण अवधिलगभग 6 महीने
वास्तविक सैन्य सेवालगभग साढ़े 3 साल
नियमित भर्ती25% अग्निवीर
शुरुआती भर्ती लक्ष्यपहले साल 46,000
आगे का भर्ती लक्ष्यप्रतिवर्ष 45,000 से 50,000

सेना के बजट पर बढ़ता खर्च भी था बड़ी वजह

अग्निपथ योजना लागू करने के पीछे सैन्य बजट का बढ़ता बोझ भी एक प्रमुख कारण था। रक्षा मंत्रालय के खर्च में वेतन, भत्तों और पेंशन की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही थी।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2022-23 में रक्षा मंत्रालय का वेतन, भत्तों और पेंशन पर कुल खर्च 2,87,040 करोड़ रुपये था। यह मंत्रालय के राजस्व खर्च का करीब 79 फीसदी था।

रक्षा क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, पिछले दशक में सैन्य कर्मियों के वेतन और पेंशन का बोझ बढ़ा है। वन रैंक वन पेंशन (OROP) और वेतन संशोधन के कारण भी पेंशन खर्च में वृद्धि हुई।

रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि इसका असर रक्षा उपकरणों की खरीद, उनके रखरखाव और अनुसंधान एवं विकास पर होने वाले खर्च पर पड़ा। सरकार चाहती थी कि सैन्य बजट का बड़ा हिस्सा आधुनिक हथियारों, तकनीक और सैन्य क्षमता बढ़ाने पर खर्च किया जा सके।

अग्निपथ योजना का विरोध क्यों हुआ था?

वहीं अग्निपथ योजना को शुरुआत से ही कई राज्यों में युवाओं ने विरोध किया था। इसके अलावा विपक्ष ने भी इस योजना को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा था। विपक्ष और सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं की आपत्ति चार साल की सीमित सेवा अवधि और स्थायी नौकरी के कम अवसर को लेकर थी।

इसके अलावा कोविड के दौरान भर्ती प्रक्रिया में आई रुकावट और अधिकतम आयु सीमा 21 साल रखे जाने से भी युवाओं में नाराजगी थी। इस योजना का युवाओं ने जमकर विरोध किया। कई जगहों पर हिंसक विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। ट्रेनों और बसों में आगजनी हुई और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया।

बाद में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने भी योजना पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि इससे सैनिकों के करियर, सैन्य प्रशिक्षण, यूनिट के भीतर तालमेल और सेना की युद्धक क्षमता पर असर पड़ सकता है।

विरोध के बाद केंद्र सरकार ने 2022 की भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 23 साल कर दी थी। इसके अलावा पूर्व अग्निवीरों के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और असम राइफल्स में 10 फीसदी आरक्षण की घोषणा की गई। कई राज्यों ने पुलिस भर्ती में भी पूर्व अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की बात कही थी।

अग्निपथ योजना लागू करने के प्रमुख कारण

कारणउद्देश्य
सेना की औसत उम्र कम करनासैन्य बलों को युवा बनाना
वेतन और पेंशन का खर्चरक्षा बजट का बोझ कम करना
आधुनिक हथियारों पर खर्चसैन्य आधुनिकीकरण को बढ़ावा देना
तकनीकी क्षमता बढ़ानाआधुनिक युद्ध के लिए सेना को तैयार करना
सैन्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमालरक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाना

सेना की समीक्षा में क्या सामने आया?

अग्निपथ योजना के शुरुआती चार साल के अनुभव के बाद तीनों सेनाओं ने इसकी समीक्षा की। CDS जनरल एनएस राजा सुब्रमणि के मुताबिक, समीक्षा में अग्निवीरों का प्रदर्शन कई मामलों में अच्छा पाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, अग्निवीरों ने शारीरिक फिटनेस, अनुशासन, काम के प्रति प्रेरणा, तकनीक को अपनाने की क्षमता और सैन्य कौशल के मामले में अच्छा प्रदर्शन किया है।

भर्ती प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी और एकसमान बनाया गया है। अब चयन प्रक्रिया में पहले लिखित परीक्षा होती है और उसके बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके अलावा महिला अग्निवीरों के लिए भी भर्ती के अवसर बढ़ाने की बात कही गई है।

CDS के मुताबिक, करीब 25 से 30 फीसदी अग्निवीर पहले से ही ऑपरेशनल क्षेत्रों में तैनात हैं और सक्रिय सैन्य जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

क्या दो साल का विस्तार सेना की चुनौतियां खत्म कर देगा?

सरकार का नया फैसला अग्निपथ योजना को लेकर उठ रही सबसे बड़ी चिंताओं में से एक का समाधान करने की कोशिश है। पहले चार साल बाद 75 फीसदी अग्निवीरों को सेना से बाहर होना पड़ता था। अब उन्हें दो साल का अतिरिक्त अनुभव और नियमित सैनिक बनने का एक और अवसर मिलेगा।

हालांकि, इस बदलाव से सभी अग्निवीरों को स्थायी नौकरी मिलने की गारंटी नहीं है। नियमित सेवा के लिए चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा।

इसके अलावा सेना के सामने यूनिट के भीतर तालमेल, अनुभवी सैनिकों की उपलब्धता और लंबे समय तक सैन्य प्रशिक्षण पर खर्च किए गए संसाधनों का बेहतर उपयोग करने जैसी चुनौतियां भी हैं।

सरकार का दावा है कि नए बदलाव से सेना की कार्यक्षमता और यूनिट की एकजुटता प्रभावित नहीं होगी। लेकिन इस व्यवस्था का वास्तविक असर आने वाले वर्षों में ही सामने आएगा।

कुल मिलाकर, अग्निपथ योजना में यह बदलाव सरकार की ओर से एक महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार है। इससे हजारों अग्निवीरों को सेना में दो साल और सेवा का मौका मिलेगा। साथ ही उन्हें नियमित सैनिक बनने के लिए पहले की तुलना में एक अतिरिक्त अवसर भी मिलेगा। हालांकि, स्थायी नौकरी का रास्ता अभी भी चयन और मेरिट से ही होकर गुजरेगा।

रिटायरमेंट के बाद पूर्व एयर चीफ एपी सिंह ने क्या कहा?

The Week में पूर्व एयर चीफ एपी सिंह का इंटरव्यू प्रकाशित हुआ है। इसमें उन्होंने बताया कि भारत हमेशा विदेशी विमानों पर निर्भर नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि 

लड़ाकू विमान 30-40 साल तक इस्तेमाल होते हैं। इस दौरान उनके स्पेयर पार्ट्स, सॉफ्टवेयर, हथियार और तकनीकी अपग्रेड की जरूरत पड़ती है। अगर इन सबके लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़े, तो युद्ध के समय भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।

पूर्व एयर चीफ ने कहा कि आत्मनिर्भरता जरूरी है, लेकिन देश की सुरक्षा को स्वदेशी परियोजनाओं के इंतजार में कमजोर नहीं छोड़ा जा सकता।