
बंगाल में बीजेपी ने जीती 207 सीटें (Photo-IANS)
बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर 4 मई को नतीजे (Bengal Result) आ गए। बीजेपी को 207 सीटों पर जीत मिली है। 8 मई को भाजपा की विधायक दल की बैठक है। 9 मई को नई सरकार शपथ लेगी। नतीजे सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर एनालिसिस का दौर शुरू हो गया है।
बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 49 सीटों पर मतदाताओं की संख्या लगभग 90 प्रतिशत हिंदू है। इस चुनाव में भाजपा ने इन सभी 49 सीटों पर क्लीन स्वीप कर दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा इन 49 में से केवल 20 सीटों पर आगे थी, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 29 पर बढ़त हासिल थी। वहीं, साल 2021 के विधानसभा के नतीजों पर गौर करे तो तृणमूल कांग्रेस को इन 49 सीटों में से 27 सीटों पर जीत हालिस हुई थी, लेकिन इस बार तृणमूल का खाता भी नहीं खुला।
खास बात यह है कि सबसे तेज बदलाव उन सीटों पर दिखा जिन्हें तृणमूल पिछले एक दशक से लगातार जीतती आ रही थी। हुगली जिले की सेरामपुर, चिंसुराह और पश्चिम मेदिनीपुर की केशलारी सीटें 2011 से किसी अन्य पार्टी के खाते में नहीं गई थीं। साबंग में वरिष्ठ मंत्री मनस भुनिया, जो सात बार लगातार जीत चुके थे, अपने ही गढ़ में भाजपा से हार गए। ये 49 सीटें उत्तर और दक्षिण बंगाल दोनों में फैली हुई हैं।
उत्तर में अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी से लेकर दक्षिण में नदिया, हुगली, झाड़ग्राम, पुरुलिया, बांकुरा और पश्चिम मेदिनीपुर तक। इन हिंदू बाहुल वोटरों वाली सीटों ने साफ-साफ दिखा दिया कि हिंदू मतदाता कितनी निर्णायक रूप से भाजपा की ओर शिफ्ट हो गए हैं। आकंड़ों से यह भी पता चलता है कि भाजपा ने उत्तर बंगाल की 54 में से 40 सीटों पर जीत हासिल की। यही नहीं, भाजपा पूरे चुनाव के दौरान बांग्लादेश घुसपैठिए मुद्दे को भुनाते रही।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बार-बार ममता सरकार पर रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को वोट बैंक के लिए शरण देने का आरोप लगाया। वहीं, जब निर्वाचन सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) की घोषणा हुई, भाजपा ने इसे अवैध नामों की सफाई के रूप में प्रचारित किया। लेकिन भाजपा कार्यकर्ता इससे पहले के निरंतर प्रयासों का श्रेय देते हैं। राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की भी इसमें काफी भूमिका रही। संघ के कार्यकर्ता व पदाधिकारी लगातार राज्य में हिंदू सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा महीनों तक चलाए गए विरोध प्रदर्शनों को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से समर्थन देते रहे।
इधर, ममता बनर्जी के हिंदू वोटरों को लुभाने के प्रयास बेकार साबित हुए। इसका सबसे बड़ा प्रतीक दिघा में जगन्नाथ धाम मंदिर था। 250 करोड़ रुपये की लागत से अप्रैल में प्राण-प्रतिष्ठित किया गया, लेकिन वह भी वोट में तब्दील नहीं करा सके। हालांकि, टीएमसी को मुस्लिम बाहुल्य सीटों में जीत मिली। TMC के 32 मुस्लिम उम्मीदवार विधायक बने। पार्टी ने 47 मुस्लिम कैंडिडेट्स को टिकट दिया था।
Updated on:
06 May 2026 12:54 pm
Published on:
06 May 2026 12:50 pm
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