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BRICS Summit से पहले झुग्गियों पर पर्दा! कांग्रेस का केंद्र पर हमला, पवन खेड़ा बोले- मोदी की विफलताओं को छिपाने की कोशिश

Delhi Slums Covered BRICS: BRICS शिखर सम्मेलन से पहले दिल्ली में झुग्गी बस्तियों को पर्दों और बैरिकेड्स से ढकने को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा। पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार विदेशी मेहमानों से गरीबी की हकीकत छिपा रही है...
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भारत

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Ashib Khan

Sep 12, 2026

BRICS 2026 Delhi controversy

दिल्ली में ढकी गई कच्ची बस्तियां (Photo-X Pawankhera)

BRICS Summit Delhi Slums: भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन से पहले दिल्ली में प्रमुख मार्गों के किनारे स्थित झुग्गी बस्तियों और कम आय वाले इलाकों को बड़े पर्दों और अस्थायी बैरिकेड्स से ढक दिया गया। इसके सोशल मीडिया पर काफी वीडियो भी सामने आए है। इसके बाद कांग्रेस ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला है।

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इसको लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो शेयर करते हुए आरोप लगाया कि सरकार विदेशी मेहमानों से देश की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं को छिपाने की कोशिश कर रही है, जबकि गरीबी की समस्या का समाधान करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस सांसद खेड़ा ने आगे कहा कि बीजेपी के लिए सभी ‘हिजाब’ अस्वीकार्य नहीं हैं। जो हिजाब मोदी की विफलताओं को ढकता है, वह उनका पसंदीदा है।

लोगों ने दिए रिएक्शन

कांग्रेस सांसद के शेयर वीडियो पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान कच्चियों बस्तियों को ढकने के लिए लगाए गए पर्दों का फोटो शेयर किया। उन्होंने कैप्शन में लिखा- सुपर PM सोनिया के राज में यह हिजाब था!!

एक अन्य यूजर ने लिखा- यह 2010 के नई दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान की बात है। शायद आपने इस पर ध्यान नहीं दिया होगा, क्योंकि आप शीला दीक्षित की फाइलें पकड़े उनके पीछे भाग रहे थे।

‘नई विश्व व्यवस्था अभी सामने नहीं आई’: मनीष तिवारी

इसी बीच कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने ब्रिक्स समेत विभिन्न बहुपक्षीय मंचों की भूमिका को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं और ऐसे समय में विभिन्न देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया को मजबूत करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विजेता देशों द्वारा बनाई गई पुरानी वैश्विक व्यवस्था अब पूरी तरह कमजोर हो चुकी है, जबकि उसकी जगह लेने वाली नई व्यवस्था अभी सामने नहीं आई है।

तिवारी के मुताबिक, दुनिया इस समय एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहां देश बदलती परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ने का रास्ता तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि देशों और लोगों के बीच संवाद की प्रक्रिया को सक्रिय रखना जरूरी है, क्योंकि इसी बातचीत के जरिए भविष्य की एक व्यवहारिक वैश्विक व्यवस्था आकार ले सकती है।