
डीएमएफ फंड के इस्तेमाल को लेकर कैग रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर - एआई जनरेटेड)
Odisha DMF Fund CAG Report: ओडिशा में खनन से प्रभावित लोगों और इलाकों के लिए जिला खनिज फाउंडेशन यानी डीएमएफ फंड बनाया गया है। इसके इस्तेमाल को लेकर कैग ने गंभीर खामियां बताई हैं। सोमवार को ओडिशा विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में फंड जुटाने, परियोजनाओं को मंजूरी देने और उनकी निगरानी में कई कमियां सामने आई हैं।
कैग के मुताबिक, छह जिलों में 2015-16 से 2023-24 के बीच डीएमएफ के तहत 22,568.17 करोड़ रुपये जमा हुए। इसी दौरान 20,947.52 करोड़ रुपये की 17,435 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इसके बावजूद इन छह जिलों में से किसी भी डीएमएफ ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजना या मास्टर प्लान तैयार नहीं किया।
कैग ने सुंदरगढ़ और क्योंझर जिलों में डीएमएफ फंड के इस्तेमाल पर खास सवाल उठाए हैं। इन दोनों जिलों में 2015-16 से 2023-24 के बीच 9,739 परियोजनाओं के लिए 17,926.79 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों जिलों के 976 गैर-प्रभावित गांवों में 983.32 करोड़ रुपये की परियोजनाएं लागू की गईं। वहीं, 488 सीधे प्रभावित और 96 अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित गांवों में एक भी परियोजना लागू नहीं की गई। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि डीएमएफ फंड का इस्तेमाल खनन से प्रभावित लोगों और इलाकों के हित में किया जाना था।
सुंदरगढ़ डीएमएफ में प्रशासनिक खर्च के नाम पर भी कई तरह के खर्च किए गए। कैग के मुताबिक, जिले में कुल 99.81 करोड़ रुपये प्रशासनिक खर्च के तौर पर दर्ज किए गए। इनमें से 25.01 करोड़ रुपये ऐसे कामों पर खर्च हुए, जिन्हें प्रशासनिक खर्च में शामिल नहीं किया जा सकता है।
इस रकम से पुलिस गश्त के लिए वाहन, नगरपालिका कार्यालय के नवीनीकरण और कलेक्टर के घर के रीडिंग रूम की मरम्मत जैसे काम कराए गए। इसके अलावा उद्घाटन कार्यक्रम और स्कूल कार्यक्रमों पर भी रकम खर्च की गई।
कैग ने सुंदरगढ़ में हॉकी स्टेडियम के निर्माण पर हुए खर्च पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेडियम बनाने में 136.77 करोड़ रुपये डीएमएफ फंड से खर्च किए गए। कैग ने कहा कि स्टेडियम का निर्माण डीएमएफ योजना के तहत मंजूर कामों में शामिल नहीं था।
जाजपुर डीएमएफ के इस्तेमाल पर भी कैग ने आपत्ति जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में 1,164.43 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसमें से 507.02 करोड़ रुपये, यानी 43.54 प्रतिशत, अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित इलाकों में खर्च हुए। नियमों के मुताबिक, ऐसे इलाकों में अधिकतम 40 प्रतिशत रकम खर्च की जा सकती थी। यानी जाजपुर में तय सीमा से ज्यादा खर्च हुआ।
कैग ने डीएमएफ की रकम को बैंक में रखने के तरीके पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, मयूरभंज, ढेंकनाल और नबरंगपुर जिलों ने 2015 से 2024 के बीच अतिरिक्त डीएमएफ राशि को फ्लेक्सी डिपॉजिट या ऑटो स्वीप खाते में नहीं रखा। इस वजह से इन जिलों को 9.49 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ। वहीं, क्योंझर डीएमएफ को भी 84.51 करोड़ रुपये ब्याज का नुकसान हुआ।
कैग के मुताबिक, जाजपुर, क्योंझर और सुंदरगढ़ डीएमएफ से 171.79 करोड़ रुपये मनरेगा निदेशक को दिए गए। इस रकम का इस्तेमाल मनरेगा में काम करने वाले लोगों को अतिरिक्त मजदूरी देने के लिए किया गया। कैग ने कहा कि इस तरह रकम देना ग्रामीण विकास मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के खिलाफ था।
इसके अलावा, जाजपुर, क्योंझर और सुंदरगढ़ में कई परियोजनाएं पूरी होने के बाद भी 470.25 करोड़ रुपये की बची रकम डीएमएफ को वापस नहीं की गई। इस रकम पर मिले 26.51 करोड़ रुपये के ब्याज को भी वापस नहीं किया गया।
कोरोना महामारी के दौरान सुंदरगढ़ डीएमएफ से राउरकेला के एक निजी अस्पताल को 109.45 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। कैग के मुताबिक, अस्पताल को वास्तव में 98.85 करोड़ रुपये ही दिए जाने थे। इस तरह अस्पताल को 10.60 करोड़ रुपये ज्यादा भुगतान किया गया।
कैग ने ओडिशा सरकार को डीएमएफ फंड का सही हिसाब रखने की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि परियोजनाएं पूरी होने के बाद बची रकम और उस पर मिला ब्याज डीएमएफ को वापस किया जाना चाहिए। कैग ने यह भी कहा है कि मंजूर परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाए। जारी रकम का इस्तेमाल भी वित्तीय वर्ष के भीतर सुनिश्चित किया जाए।
Updated on:
29 Sept 2026 10:59 am
Published on:
29 Sept 2026 10:53 am
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