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Cancer Drug Price Control: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 137 दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने इन दवाओं पर व्यापारिक मार्जिन को अधिकतम 30 फीसदी तक सीमित करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था 9 नवंबर 2026 से लागू होगी। एनपीपीए की 16 और 17 अक्टूबर को हुई बैठकों में औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (डीपीसीओ), 2013 के पैरा 19 के तहत यह निर्णय लिया गया। प्राधिकरण के अनुसार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली 137 दवाओं को इस व्यवस्था के दायरे में रखने की सिफारिश की थी।
नई व्यवस्था के तहत दवा का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) तय करने के लिए मार्च 2026 में स्टॉकिस्ट या वितरक को बिक्री की कीमत को आधार बनाया जाएगा। इसमें निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार अधिकतम 30 फीसदी ट्रेड मार्जिन और लागू जीएसटी जोड़ा जाएगा। यदि किसी दवा की मौजूदा एमआरपी निर्धारित सीमा से अधिक है, तो कंपनी को कीमत घटानी होगी। वहीं, यदि मौजूदा कीमत नई निर्धारित सीमा से कम है, तो कंपनी को कम कीमत ही बनाए रखनी होगी। यह व्यवस्था ब्रांडेड और जेनेरिक, दोनों तरह की दवाओं पर लागू होगी।
एनपीपीए ने दवा कंपनियों को आधिकारिक राजपत्र में आदेश प्रकाशित होने के सात दिन के भीतर संशोधित एमआरपी का ब्योरा प्राधिकरण और संबंधित राज्य औषधि नियंत्रक को देने का निर्देश दिया है। कीमत में कोई बदलाव नहीं होने की स्थिति में भी यह जानकारी देना अनिवार्य होगा। कंपनियों को निर्धारित अवधि में मूल्य सूची जारी कर वितरकों, अस्पतालों और संबंधित संस्थानों तक पहुंचानी होगी। उल्लंघन पाए जाने पर डीपीसीओ, 2013 के प्रावधानों के तहत अधिक वसूली गई राशि की वसूली की कार्रवाई की जा सकेगी।
दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए एनपीपीए ने कंपनियों को मौजूदा उत्पादन स्तर बनाए रखने का निर्देश भी दिया है। यदि कोई कंपनी औसत मासिक उत्पादन घटाना चाहती है, तो उसे पहले प्राधिकरण की अनुमति लेनी होगी। वहीं, किसी दवा का उत्पादन या आयात बंद करने की स्थिति में निर्धारित प्रपत्र में कम से कम छह महीने पहले जानकारी देनी होगी। पेटेंट वाली दवाएं भी इसके दायरे में होंगी, बशर्ते उन्हें डीपीसीओ के पैरा 32 के तहत छूट प्राप्त न हो।
इम्यूनोथेरेपी: पेम्ब्रोलिजुमैब, निवोलुमैब, एटेजोलिजुमैब, एवेलुमैब, डुरवालुमैब, इपिलिमुमैब, टिसलीजुमैब, टोरीपलिमैब और रिटुक्सिमैब।
लक्षित उपचार: इब्रुटिनिब, ओसिमर्टिनिब, एलेक्टिनिब, क्रिजोटिनिब, लोरलैटिनिब, ओलापैरिब, रुकापैरिब, वेनेटोक्लैक्स, रिबोसिक्लिब और लेन्वाटिनिब।
कीमोथेरेपी: सिटाराबीन, इफोस्फामाइड, मेसना, टोपोटेकैन, विनोरेल्बाइन टार्ट्रेट, एरिबुलिन मेसिलेट, पेमेट्रेक्सेड, ट्रैबेक्टेडिन और टेम्सिरोलिमस।
हार्मोन संबंधी उपचार: एनास्ट्रोजोल, एक्सेमेस्टेन, फुल्वेस्ट्रेंट, गोसेरेलिन एसीटेट और ट्रिप्टोरेलिन।
Published on:
18 Oct 2026 02:00 am
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