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Cyclone Arnab : भारत में कब-कब आए चक्रवात, कितनी हुई तबाही? जानिए तूफानों के नाम रखने का पूरा नियम

India Cyclone History: बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात तूफान अर्नब तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे पहले भी भारत ने कई चक्रवातों का सामना किया है। इनमें 1977 का आंध्र प्रदेश चक्रवात, 1999 का ओडिशा सुपर साइक्लोन, 2013 का फैलिन, 2019 का फानी और 2020 का अम्फान प्रमुख हैं।
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भारत

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kamlesh sharma

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Updated: 27 Oct 2026, 12:07 PM IST

India Cyclone

India Cyclone (File Photo-IANS)

India Cyclone History : नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात तूफान अर्नब तेजी से आगे बढ़ रहा है। तूफान के 28 अक्टूबर की सुबह आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटे हो सकती है। मौसम विभाग ने तूफान के प्रभाव से 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ से अत्यधिक भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है। चक्रवात तूफान अर्नब से पहले भी भारत ने कई चक्रवातों का सामना किया है। इनमें 1977 का आंध्र प्रदेश चक्रवात, 1999 का ओडिशा सुपर साइक्लोन, 2013 का फैलिन, 2019 का फानी और 2020 का अम्फान प्रमुख हैं। इन आपदाओं के बाद भारत में मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात चेतावनी और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

1999 का सुपर साइक्लोन बना बड़ी त्रासदी

अक्टूबर 1999 को ओडिशा के पारादीप के पास आए सुपर साइक्लोन ने जमकर तबाही मचाई थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग के शोध के अनुसार, तूफान के केंद्र में हवा की गति 260 से 270 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई थी। समुद्र में उठी विशाल लहरों और बाढ़ ने तटीय इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। इस आपदा में करीब 9,900 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले 1977 में आंध्र प्रदेश के दिविसीमा क्षेत्र में आए चक्रवात ने भी करीब 10 हजार लोगों की जान ली थी।

चक्रवातों के नाम कौन रखता है?

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र के एशिया-प्रशांत आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (ESCAP) के क्षेत्रीय पैनल की व्यवस्था के तहत रखे जाते हैं। इस प्रक्रिया में भारत समेत 13 देश शामिल हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग का नई दिल्ली स्थित क्षेत्रीय विशेषीकृत मौसम विज्ञान केंद्र निर्धारित तीव्रता तक पहुंचने वाले चक्रवातों को सूची के अनुसार नाम देता है।

भारत के अलावा बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन इस व्यवस्था में शामिल हैं। ये देश पहले से नामों की सूची उपलब्ध कराते हैं। सूची में नामों का इस्तेमाल तय क्रम से किया जाता है और एक बार इस्तेमाल किया गया नाम दोबारा नहीं रखा जाता।

नाम रखने का मकसद क्या है?

चक्रवातों को नाम देने का मुख्य उद्देश्य चेतावनी जारी करने, मीडिया में सूचना प्रसारित करने और आम लोगों तक खतरे की जानकारी आसानी से पहुंचाने में मदद करना है। छोटे और स्पष्ट नामों से अलग-अलग तूफानों की पहचान करना आसान होता है। इससे प्रशासन, मौसम विशेषज्ञों और राहत एजेंसियों के बीच समन्वय भी बेहतर होता है।

कब-कब आए प्रमुख चक्रवात और कितना हुआ नुकसान?

वर्षचक्रवातप्रमुख नुकसान
1977आंध्र प्रदेश चक्रवातकरीब 10 हजार मौतें; दिविसीमा क्षेत्र में भारी तबाही
1999ओडिशा सुपर साइक्लोनकरीब 9,900 मौतें; व्यापक बाढ़ और संपत्ति का नुकसान
2013फैलिनओडिशा और आंध्र प्रदेश में तेज हवाएं, भारी बारिश; बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित निकाला गया
2014हुदहुदविशाखापत्तनम और आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान
2018तितलीओडिशा और आंध्र प्रदेश में जान-माल का नुकसान
2019फानीओडिशा में मकानों, पेड़ों और बिजली व्यवस्था को भारी नुकसान
2020अम्फानपश्चिम बंगाल और सुंदरबन क्षेत्र में व्यापक तबाही
2021ताउतेगुजरात सहित पश्चिमी तट पर तेज हवा और बारिश का असर
2021यासओडिशा और पश्चिम बंगाल में नुकसान
2023बिपरजॉयगुजरात के तटीय क्षेत्रों और पश्चिमी भारत में असर
2024दानाओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश
2025मोंथाआंध्र प्रदेश और तेलंगाना में नौ लोगों की मौत

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