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DRDO में साइबर सुरक्षा में लगी सेंध, रक्षा मंत्रालय ने दे दिया जवाब

DRDO cyber security: DRDO पर साइबर हमले का दावा निकला झूठा, रक्षा मंत्रालय ने बताया चार साल पुराना डेटा है, पढ़ें पूरी मामला...
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DRDO

DRDO (File Photo)

DRDO Cyberattack: रक्षा अनुसंधान संस्था यानि DRDO को लेकर बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि संस्था पर बड़ा साइबर हमला हुआ है। कहा जा रहा है कि हैकर्स ने संस्था के सिस्टम में सेंधमारी कर संवेदनशील डेटा चुरा लिया है। सोशल मीडिया पर तैर रहे इस दावे को भारतीय रक्षा मंत्रालय ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

यह खबर झूठी है: रक्षा मंत्रालय

मंगलवार देर शाम रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए कहा कि गहन जांच के बाद यह साफ हो गया है कि न तो कोई सक्रिय साइबर हमला हुआ है, न ही किसी ने अनधिकृत रूप से नेटवर्क में घुसपैठ की है और न ही कोई डेटा चोरी अभी भी जारी है। सोशल मीडिया पर फैल रहे दावे पूरी तरह से फर्जी हैं।

चार साल पुराना डेटा को लेकर दावा

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जांच में यह बात सामने आई है कि जिस डेटा को लेकर इतना हल्ला मचाया जा रहा था, उसका बड़ा हिस्सा दरअसल गोपनीय ही नहीं है। इसके अलावा जो थोड़ा बहुत संवेदनशील दिखाया जा रहा है, वह असल में साल 2020 से 2022 के बीच हुई एक पुरानी घटना से जुड़ा है।

अधिकारियों ने बताया कि शातिर लोगों ने इसी पुराने डेटा में जान बूझकर छेड़छाड़ की और उसे इस तरह पेश किया जैसे यह बिल्कुल ताजा और गोपनीय जानकारी हो। जबकि हकीकत यह है कि इन दस्तावेजों में कई बार बदलाव हो चुके हैं और अब इनका मौजूदा कामकाज या सिस्टम से कोई नाता नहीं बचा है।

पैसा कमाने के लिए फैलाई जा रही दहशत

जांच एजेंसियों ने यह भी पाया कि यही पुराना और बेकार पड़ा डेटा कई साइबर अपराधी अलग अलग जगहों पर बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इससे साफ है कि इसका मकसद देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि सीधे तौर पर पैसा कमाना है। अधिकारियों के अनुसार ये लोग डेटा को असली और गोपनीय बताकर उसकी कीमत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि खरीदार मोटी रकम देने को तैयार हो जाएं। डर और भ्रम फैलाना इस पूरे खेल का सबसे बड़ा हथियार है।

DRDO के सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि DRDO का सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित है। इसमें किसी भी तरह की संवेदनशील या गोपनीय जानकारी से समझौता नहीं हुआ है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह देश की साइबर सिक्योरिटी को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

मीडिया से अपील, बिना पुष्टि खबर न चलाएं

इस पूरे विवाद के बीच रक्षा मंत्रालय ने मीडिया संस्थानों से भी अपील की है कि किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले उसकी पूरी तरह पुष्टि जरूर कर ली जाए। मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह बात लगभग तय हो गई है कि DRDO पर किसी नए साइबर हमले की बात पूरी तरह झूठी थी, और देश की रक्षा प्रणाली की मजबूती पर लोगों का भरोसा और गहरा हुआ है।