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भारत में Starlink लाना चाहते हैं एलन मस्क, क्या है सबसे बड़ी चिंता? जानिए, सेवा बंद होने पर क्या होगा

अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक शुरू करना चाहते हैं। मस्क का दावा था कि कुछ कारोबारी भारत में स्टारलिंक की शुरुआत रोककर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं।
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भारत

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kamlesh sharma

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Oct 16, 2026

elon musk Starlink India Row

अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क (फोटो- ANI)

Elon Musk Starlink India :नई दिल्ली। अमेरिकी कारोबारी एलन मस्क भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक शुरू करना चाहते हैं। मस्क का दावा था कि कुछ कारोबारी भारत में स्टारलिंक की शुरुआत रोककर अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, भारत में इस सेवा को लेकर एक बड़ी चिंता भी सामने आ रही है। सवाल यह है कि अगर भविष्य में मस्क किसी देश में स्टारलिंक की सेवाएं बंद कर दें, तो क्या वहां का इंटरनेट और जरूरी संचार तंत्र प्रभावित हो सकता है? यूक्रेन का अनुभव इसी खतरे की ओर इशारा करता है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि भारत को स्टारलिंक की मंजूरी देने से पहले अपनी संचार व्यवस्था की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर विचार करना चाहिए। भारत के लिए चुनौती सिर्फ दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि किसी विदेशी कंपनी की सेवा बंद होने पर देश का संचार तंत्र ठप न हो। रूस के साथ युद्ध के दौरान यूक्रेन की सेना के लिए स्टारलिंक एक अहम संचार माध्यम बन गया है। युद्ध के कारण कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और फाइबर ऑप्टिक केबल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट की मदद से सैनिक और सैन्य कमांडर एक-दूसरे से संपर्क बनाए रख सकते हैं।

भारत के लिए क्या है सबसे बड़ी चिंता?

स्टारलिंक भारत के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसकी उपयोगिता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आम लोग इसकी सेवा का खर्च उठा पाते हैं या नहीं। भारत के सामने दूसरी बड़ी चिंता विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क पर निर्भरता की है। यदि किसी राजनीतिक, सैन्य या कारोबारी विवाद के कारण सेवा अचानक बंद कर दी जाए, तो संचार व्यवस्था के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने की संभावनाओं के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या देश अपनी जरूरतों के लिए किसी एक विदेशी कंपनी पर निर्भर रह सकता है। दिसंबर 2025 तक देश के 6,34,955 गांवों में से 6,44,131 गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी से कवर किया जा चुका है।

चीन, ताइवान और यूरोप ने भी निकाला अपना रास्ता

विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क पर निर्भरता के जोखिम को देखते हुए कई देश अपने विकल्प विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।

  • चीन: वर्ष 2020 में चीन ने अंतरराष्ट्रीय निकाय के समक्ष अपने 13,000 इंटरनेट सैटेलाइट लॉन्च करने की योजना दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले चीन को मस्क से यह आश्वासन नहीं मिला था कि स्टारलिंक का दुरुपयोग नहीं होगा।
  • ताइवान: समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों के जरिए दुनिया से जुड़ा ताइवान संभावित चीनी हमले की स्थिति में इन केबलों के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए स्टारलिंक अपनाने को लेकर सतर्क रहा है।
  • यूरोपीय संघ: न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूरोपीय संघ ने नागरिक और सैन्य उपयोग के लिए अपना सैटेलाइट नेटवर्क तैयार करने के उद्देश्य से पिछले साल 2.4 अरब यूरो यानी करीब 2.6 अरब डॉलर निर्धारित किए थे।

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