
सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच सैन्य संघर्ष तेज (फोटोःAI)
Houthi rebels and Saudi Arabia: सऊदी अरब और यमन के अंसार अल्लाह, जिसे आमतौर पर हूती विद्रोही भी कहा जाता है, उनके बीच सैन्य संघर्ष फिर से तेज हो गया है। हूती विद्रोही शिया इस्लाम की जैदी शाखा से जुड़े हैं। यमन में जैदी आबादी का बड़ा हिस्सा हैं। साल 2011 में अरब स्प्रिंग के बाद जब यमन में सत्ता कमजोर हुई। तब हूतियों ने सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया और 2014 में राजधानी सना में कब्जा जमा लिया। हालांकि, उनके वर्चस्व को कभी भी सऊदी और GCC ने मान्यता नहीं दी। शिया पंथ से ताल्लुक रखने के कारण ईरान का समर्थन उसे लगातार मिलता रहा। ईरान ने यमन के हूतियों, ईराक के शिया मिलिशिया, सीरिया में असद रीजिम और लेबनान में हिज्बुल्लाह का गठजोड़ बनाया और इसे एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस का नाम दिया।
ईरान के समर्थन से हूती बीते कई सालों से सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन को पीछे धकेलने में काफी हद तक कामयाब रहे हैं। यही वजह थी कि साल 2015 में MBS के नेतृत्व में छेड़ी गई जंग को साल 2022 में सीजफायर के द्वारा रोकना पड़ा था, लेकिन साल 2026 में सऊदी अरब के हमले के बाद से हूती विद्रोहियों ने फिर से मिसाइलें रियाद की तरफ लॉक कर दी है और इसका गहरा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सऊदी अरब की छवि पर पड़ा है।
यूरोपीय संघ और GCC ने 24 अक्टूबर को रियाद में होने वाला शिखर सम्मेलन स्थगित कर दिया है। इसमें यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर और UAE के नेताओं को ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा पर चर्चा करनी थी। GCC महासचिव जासिम अलबुदैवी ने कहा कि हूती गुट सऊदी अरब और उसकी नागरिक संरचनाओं को निशाना बनाने की कोशिश कर रहा है। इससे प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता है। GCC सचिवालय के अनुसार रियाद के मुख्य हवाई अड्डे पर उड़ानों का लंबा निलंबन भी तैयारियों को प्रभावित कर रहा था। वहीं, EU ने सम्मेलन रद्द होने की वजह के बारे में विस्तार से नहीं बताया, सिर्फ इतना कहा कि नई तारीख का ऐलान उचित समय पर होगा।
हालिया संघर्ष में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफाइनरी अरामको पर हमला किया। उसके सबसे बड़े पाइप लाइन को नुकसान पहुंचाया। यहां तक कि बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य में सऊदी अरब के जहाजों पर हमला कर बड़ी चोट दी। 10 अक्टूबर को हूतियों ने रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया, जिसमें 13 लोग मारे गए, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हुए। वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट की विशेषज्ञ अप्रैल लॉन्गली एली के अनुसार यह एक दशक से ज़्यादा समय में सऊदी अरब पर सबसे घातक हमला था। सामरिक मामलों पर नजर रखने वाली एक संस्था ने कहा कि 5 अक्टूबर से अब तक सऊदी अरब के लगभग सभी बड़े एयरपोर्ट को हूती विद्रोहियों ने निशाना बनाया है। जिनमें 20 लोगों की मौत हुई। हालांकि, सऊदी अरब की कार्रवाई में भी कई हूती विद्रोही मारे गए।
सऊदी अरब की तरफ से कहा गया कि इस तनाव को ईरान बढ़ावा दे रहा है। ईरान ने सऊदी अरब के इन आरोपों को सिरे से नाकर दिया है। मिडिल ईस्ट आई के अनुसार विश्लेषकों और राजनयिकों का मानना है कि हूतियों को नियंत्रित रखने की सऊदी रणनीति ढह रही है और यह क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के लिए उनके सत्ता में आने के बाद की सबसे गंभीर परीक्षाओं में से एक है। किंग्स कॉलेज लंदन के रॉब गीस्ट पिनफोल्ड ने इसे सऊदी कंटेनमेंट रणनीति का पतन बताया है। सामरिक मामलों के जानकारों का कहना है कि शिखर सम्मेलन स्थगित होना सऊदी अरब के लिए कूटनीतिक झटका है।
विश्लेषकों के अनुसार EU इस सम्मेलन को सऊदी अरब और खाड़ी देशों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए भी चाहता था। सम्मेलन के दो दिन बाद होने वाला फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (FII) भी स्थगित हो गया है। सितंबर से अब तक सऊदी अरब कम से कम नौ बड़े आयोजन रद्द, स्थगित या सीमित कर चुका है। इससे सऊदी अरब के विजन 2030 को बड़ी चोट पहुंची है। EU-GCC व्यापार लगभग 165.6 अरब यूरो का है। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और उड़ानें रद्द होने की वजह से वैश्विक व्यापार में उथल पुथल की स्थिति बनी रहेगी।
वहीं भारत पर संभावित असर को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि वहां बड़ी संख्या में प्रवासी रहते हैं। खाड़ी देशों से भारत बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आपूर्ति करता है। लंबे तनाव से तेल कीमतों, रेमिटेंस और भारतीय एयरलाइनों के रूट प्रभावित हो सकते हैं। इससे भारतीय बाजार और भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा और लंबा असर पड़ सकता है।
Updated on:
24 Oct 2026, 1:26 PM IST
Published on:
24 Oct 2026, 1:26 PM IST
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