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Supreme Court Order: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरीश साल्वे का बड़ा बयान, बोले- सरकार को शर्मिंदा करने की कोशिश नाकाम

Supreme Court Special Hearing: हरीश साल्वे ने अदालत के रुख को बताया सोच-समझकर लिया गया फैसला। उनके बयान में छिपा संदेश साफ है राहत और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी लोकतंत्र की बड़ी कसौटी है।
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भारत

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Manoj Vashisth

•

Oct 12, 2026

Harish Salve on Protesters

Harish Salve on Protesters: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरीश साल्वे की दोटूक, बोले- जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध हटें (फोटो सोर्स: ANI)

Harish Salve Statement: सुप्रीम कोर्ट की रविवार को हुई विशेष सुनवाई और प्रदर्शनकारियों को मिली राहत पर वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने अदालत के फैसले को संतुलित बताते हुए कहा कि न्यायपालिका ने एक तरफ आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों को राहत देने का रास्ता खोला, तो दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था को खतरे में डालने वाली मांगों को स्वीकार नहीं किया। साल्वे के बयान ने अदालत के आदेश, विरोध-प्रदर्शन और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन की बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।

पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़े कुछ पक्षों का मकसद सरकार को असहज स्थिति में डालना था। उनके मुताबिक, ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि सुप्रीम कोर्ट सभी बैरिकेड हटाने और लोगों को दिल्ली में बेरोकटोक प्रवेश की अनुमति देने का निर्देश देगा। साल्वे ने इस संभावना को खारिज करते हुए कहा कि अदालत से ऐसा आदेश मिलने की उम्मीद नहीं थी और वास्तव में ऐसा हुआ भी नहीं।

उन्होंने न्यायालय के फैसले की व्याख्या करते हुए कहा कि आदेश में जरूरत से ज्यादा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की बात कही गई। उनके अनुसार, अदालत ने ऐसा कोई व्यापक निर्देश नहीं दिया, जिससे सुरक्षा संबंधी सभी व्यवस्थाएं समाप्त हो जाएं। इस तरह आदेश का उद्देश्य प्रतिबंधों की समीक्षा करना था, न कि व्यवस्था को पूरी तरह हटाकर अनियंत्रित आवाजाही की अनुमति देना।

Harish Salve Statement: अदालत के सामने दोहरी चुनौती

ऐसे मामलों में न्यायपालिका के सामने अक्सर दो महत्वपूर्ण सवाल होते हैं। पहला, नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने और अपनी बात रखने का अधिकार कैसे सुरक्षित रखा जाए। दूसरा, सार्वजनिक स्थानों पर कानून-व्यवस्था, यातायात और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम कैसे जारी रहें।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है। हालांकि, ये अधिकार उचित संवैधानिक प्रतिबंधों के अधीन हैं। इसलिए किसी प्रदर्शन के दौरान प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनके दायरे और उनके प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण हो जाता है।

बैरिकेडिंग पर बहस का व्यापक पहलू

दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले महानगर में सुरक्षा बैरिकेडिंग का असर केवल प्रदर्शनकारियों तक सीमित नहीं रहता। इससे कार्यालय जाने वाले लोगों, स्थानीय निवासियों, कारोबारियों और आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम हटाने से अप्रत्याशित परिस्थितियां पैदा होने का जोखिम रहता है। यही वजह है कि प्रतिबंधों को आवश्यक सीमा तक रखने और उनकी समय-समय पर समीक्षा करने की मांग उठती रही है।