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यशोधरा की लव मैरेज रोकने जेल से बाहर निकली थीं विजया राजे, पर बेटी ने कर दी थी बगावत

आपातकाल के दौरान राजमाता विजया राजे सिंधिया की पैरोल पर रिहाई, संपत्ति बचाने की चिंता और बेटी यशोधरा राजे सिंधिया की प्रेम कहानी ने उनके जीवन में नया मोड़ ला दिया। जानिए कैसे सिद्धार्थ भंसाली से शादी की जिद के आगे राजमाता को झुकना पड़ा।
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Vijaya Raje Scindia wanted not to proceed yashodhara raje love story

यशोधरा राजे सिंधिया (फाइल फोटो-IANS)

आपातकाल के दिन थे। कई नेताओं के साथ विजया राजे सिंधिया भी गिरफ्तार कर ली गई थीं। लेकिन, उन्हें जेल से बाहर आना था। उनकी बेटी यशोधरा राजे सिंधिया 21 साल की हो चुकी थीं। मां होने के नाते उन्हें बेटी की शादी की चिंता सता रही थी। यह चिंता ज्यादा इसलिए भी थी, क्योंकि यशोधरा को किसी से प्यार हो गया था। विजया राजे को वह शख्स एकदम पसंद नहीं था। इसलिए वह अपनी पसंद और हैसियत के किसी लड़के से जल्दी से जल्दी बेटी की शादी करवाना चाहती थीं। इसी बीच मेडिकल ग्राउंड पर विजया राजे को पैरोल पर रिहाई मिल गई। 'द लास्ट महारानी ऑफ ग्वालियर: एन ऑटोबायोग्राफी' में उन्होंने लिखा है, 'जेल गई राजनीतिक कारणों से थी, बाहर घरेलू वजह से निकली थी।'

जेल से निकलने के बाद विजया राजे की दो बड़ी चिंता थी। एक तो अपनी संपत्ति सरकार के कब्जे से बचाना और दूसरी, बेटी की शादी करवाना। पैरोल के चलते वह ज्यादा वक्त दिल्ली में ही बिता रही थीं। पूरा परिवार एक साथ था। लेकिन, दिल्ली में उनके पास कोई ऐसी जगह नहीं थी जहां पूरा परिवार एक साथ आराम से रह सके। उनकी सिरैमिक फैक्ट्री के मैनेजर का एक बंगला था। सिंधिया परिवार उसी बंगले का इस्तेमाल किया करता था।

विजया राजे को संन्यास का ख्याल आया...फिर चला भी गया

विजया राजे कुछ समय के लिए दतिया गईं। अपने 'गुरु-महाराज' से मिलने। वहां जाकर उन्हें सुकून लगा। वहां उन्होंने अपने लिए कुछ कमरे बनवा लिए। कुछ समय के लिए उन्हें लगा कि सब कुछ छोड़ कर संन्यास ले लिया जाए। दिल्ली लौट कर उन्होंने वकील को बुलवाया और सारी संपत्ति पर अधिकार छोड़ने संबंधी दस्तावेज़ तैयार करने के लिए कहा। वकील गया तो तीन हफ्ता तक लौट कर नहीं आया। इस बीच विजया राजे का संन्यास का भूत भी उतर चुका था।

बेटी यशोधरा राजे के प्यार में पड़ जाने से परेशान थीं राजमाता विजया राजे सिंधिया

उधर, यशोधरा पर प्यार का भूत सवार ही था। विजया राजे चाह कर भी इसे उतार नहीं पा रही थीं। बेटी के प्यार का नाम था सिद्धार्थ। वह मुंबई के नामी कार्डियोलोजिस्ट डॉ कीर्तिलाल भंसाली का सबसे छोटा बेटा था। उसने उस समय डॉक्टर की डिग्री ली थी और एक अस्पताल में बतौर इंटर्न काम कर रहा था।

यशोधरा और सिद्धार्थ बंबई के रेस कोर्स में मिले थे। यशोधरा ने पहले ही उससे साफ कह दिया था कि अगर शादी नहीं करनी हो तो बात आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है। इसके बाद उनकी मुलाकातें बढ़ती गईं और दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करने लगे। लेकिन, विजया राजे इस जोड़ी को बेमेल बता कर यशोधरा से बार-बार सिद्धार्थ को भूल जाने के लिए कहतीं। उन्होंने बेटी के लिए एक लड़का भी चुन लिया, लेकिन बेटी उससे मिलने तक को राजी नहीं हुई। मां ने जिद की तो साफ कह दिया, 'मैंने फैसला कर लिया है। शादी सिद्धार्थ से करूंगी।' यह कहने पर कि अगर हमने नहीं करने दी तो? यशोधरा का जवाब था- ज़िंदगी भर शादी नहीं करूंगी।

बेटी की बगावत ने याद दिला दिया मां का किस्सा

विजया राजे ने अपनी जीवनी में लिखा है कि बेटी की बात सुन कर उन्हें उनकी मां का किस्सा याद आ गया। उनके माता-पिता ने भी एक लड़के की फोटो दिखा कर उनसे उस लड़के से शादी करने के लिए कहा था। विजया राजे की मां का भी वही जवाब था जो उनकी बेटी ने दिया था। फिर भी, उन्हें उम्मीद थी कि समय के साथ यशोधरा मान जाएगी। लेकिन कितना समय लेगी, इसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं था।

समय बीतता गया, लेकिन यशोधरा का फैसला वही रहा। विजया राजे एक बार फिर संपत्ति से जुड़े मामलों में व्यस्त हो गईं। यशोधरा के सामने अंत में उन्हें झुकना पड़ा। सिद्धार्थ से शादी की मंजूरी देनी पड़ी। 9 मार्च, 1977 को शादी की तारीख तय हुई।

20 मार्च को भंसाली परिवार ने बंबई में रिसेप्शन का आयोजन किया था। उसी दिन आपातकाल के बाद हुए चुनाव के परिणाम भी आ रहे थे। पार्टी शबाब पर थी कि तभी खबर आई कि इंदिरा गांधी को राज नारायण ने चुनाव में हरा दिया है।

विजया राजे सिंधिया खानदान की पहली व्यक्ति थीं, जो चुनावी राजनीति में उतरी थीं। अपना राज बचाने के डर से वह न चाहते हुए भी कांग्रेस से चुनाव लड़ी थीं।

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