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अरुणाचल में भारत-चीन सेनाओं की पहली कोर कमांडर बैठक, एलएसी के मुद्दों पर हुई सीधी चर्चा

India China Border Talks: अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन की सेनाओं के बीच पहली बार कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ता हुई। बैठक में वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े मुद्दों और क्षेत्र में शांति बनाए रखने पर चर्चा हुई।
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भारत

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Rakesh Mishra

Sep 06, 2026

India China Border Talks

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली। भारत और चीन की सेनाओं के बीच रविवार को अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़े मुद्दों को लेकर महत्वपूर्ण सैन्य वार्ता हुई। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों ने अरुणाचल प्रदेश के वाचा-दमाई सीमा बैठक स्थल पर कोर कमांडर स्तर की इस पहली बैठक में हिस्सा लिया। सेना के पूर्वी सेक्टर में इस स्तर की यह पहली बैठक है। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब क्षेत्र में भारत और चीन के बीच एलएसी को लेकर कुछ मुद्दे अब भी बने हुए हैं।

मुद्दों को सुलझाने की दिशा में बातचीत

माना जा रहा है कि 6 सितंबर को हुई इस बैठक में दोनों पक्षों ने क्षेत्र में जारी मुद्दों पर चर्चा की। वार्ता में मुद्दों को सुलझाने की दिशा में बातचीत की गई। बैठक भारतीय क्षेत्र में स्थित वाचा सीमा बैठक स्थल पर आयोजित की गई। इस सैन्य वार्ता में भारतीय पक्ष का नेतृत्व तीसरी कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया ने किया। अरुणाचल प्रदेश में चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा की सुरक्षा और सैन्य जिम्मेदारियों को भारतीय सेना की दो प्रमुख कोर संरचनाएं संभालती हैं। इनमें तेजपुर स्थित चौथी कोर और रंगापाहर स्थित तीसरी कोर शामिल हैं।

भारतीय सेना ने बेहद दृढ़ और स्पष्ट रुख अपनाया

इस क्षेत्र में चीनी सैनिकों की ओर से अपनाए जा रहे रुख को लेकर भारतीय सेना ने बेहद दृढ़ और स्पष्ट रुख अपनाया है। भारतीय के इस रुख ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह सुरक्षा और ऑपरेशनल हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। अलग-अलग धारणाएं कई बार सीमा पर गश्त, सैनिकों की गतिविधियों और इलाके में मौजूदगी को लेकर विवाद की स्थिति पैदा करती हैं। दरअसल, अब तक भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ताएं मुख्य रूप से लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक स्थल पर होती रही हैं। यहां वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों सेनाओं के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। इस झड़प में दोनों पक्षों के सैनिक हताहत हुए थे।

सैन्य तैयारियों को व्यापक रूप से मजबूत किया

गलवान घटना के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की। साथ ही पर्वतीय युद्ध के लिए अपनी सैन्य तैयारियों को व्यापक रूप से मजबूत किया। भारत ने चीन की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के किसी भी प्रयास का कड़ा जवाब दिया था। वहीं अब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने और शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा के बाद दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी। इसी व्यापक प्रक्रिया के बीच अरुणाचल प्रदेश में पहली बार कोर कमांडर स्तर की बैठक होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सेठ ने किया था तीसरी कोर मुख्यालय का दौरा

इससे संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष पूर्वी सेक्टर में की समस्याओं को सैन्य स्तर की सीधी बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।इस बीच कुछ ही दिन पहले भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने तीसरी कोर मुख्यालय का दौरा किया था। रंगापाहर स्थित तीसरी कोर पहुंचने पर उन्हें क्षेत्र में सैन्य तैयारियों, ऑपरेशनल स्थिति और युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की थी। सेना की यह तीसरी कोर अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के संवेदनशील हिस्सों की निगरानी और सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और चीन के साथ सीमा विवाद को देखते हुए यहां सैनिकों की परिचालन तैयारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। 2020 के गलवान संकट के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में अपनी सैन्य तैनाती और परिचालन रणनीति में व्यापक बदलाव किए थे।