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SIR Voter List Controversy: दिल्ली में सुरक्षा के घेरे और SIR पर सियासी संग्राम, जयराम रमेश ने चुनाव आयोग से पूछे तीखे सवाल

Gyanesh Kumar CEC: मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया अब राजनीतिक टकराव का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। कांग्रेस के आरोपों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका, नागरिकों के मतदान के अधिकार और युवाओं के विरोध प्रदर्शन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
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भारत

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Manoj Vashisth

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Oct 10, 2026

Jairam Ramesh SIR

Jairam Ramesh ने मतदाता सूची और EC की भूमिका पर साधा निशाना (फोटो-ANI)

SIR Voter List Controversy: दिल्ली में वोटिंग और सिक्योरिटी को लेकर पॉलिटिकल बहस और भी गरम होती जा रही है। कांग्रेस लीडर जयराम रमेश ने प्रोटेस्ट कर रहे युवाओं का साथ दिया है, और केंद्र सरकार और इलेक्शन कमीशन दोनों पर निशाना साधा है। वह वोटर लिस्ट के “स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन” (SIR) को लेकर खास तौर पर परेशान हैं। उनका कहना है कि इसने लाखों लोगों से वोट देने का अधिकार छीन लिया है, जिससे चुनावी ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी फिर से चर्चा में आ गई है।

राजधानी दिल्ली में युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बीच सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने का मुद्दा राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत नागरिकों को मिले मतदान के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर प्रदर्शन को लेकर चिंता जताने के बजाय युवाओं की आवाज को समझने की जरूरत पर जोर दिया।

जयराम रमेश के बयान के मुताबिक, राजधानी में बड़ी संख्या में हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच युवा अपने मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग की।

145 सांसदों के निलंबन और कानून का भी उठाया मुद्दा

कांग्रेस नेता ने दिसंबर 2023 में संसद से 145 विपक्षी सांसदों के निलंबन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि उसी दौरान एक ऐसा कानून पारित कराया गया, जिसने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को आजीवन कानूनी संरक्षण प्रदान किया। उनके अनुसार, इस घटनाक्रम ने निर्वाचन आयोग की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष गलत जानकारी दी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का विस्तृत जवाब इस बयान में उपलब्ध नहीं है।

SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर भी कांग्रेस नेता ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया से करीब 14 करोड़ भारतीयों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ा है और इसे तत्काल रोकने की जरूरत है। यह आंकड़ा उनके बयान में किया गया दावा है; इसकी पुष्टि के लिए निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों और संबंधित राज्यों के रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करना और पात्र मतदाताओं के विवरण को अद्यतन करना है। हालांकि, ऐसी प्रक्रिया के दौरान नाम हटाने, दस्तावेजों की उपलब्धता और दावों-आपत्तियों के निपटारे को लेकर पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है। मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम छूटने पर वह चुनाव में मतदान से वंचित हो सकता है।

लोकतंत्र में भरोसा बहाल करने की चुनौती

जयराम रमेश ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगना व्यापक लोकतांत्रिक सुधार की दिशा में केवल पहला कदम है। उनके मुताबिक, चुनावी व्यवस्था में जनता का भरोसा मजबूत करने के लिए जवाबदेही, निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।

फिलहाल, इस पूरे विवाद के केंद्र में तीन अहम सवाल हैं मतदाता सूची में बदलाव किस आधार पर हो रहे हैं, नागरिकों की शिकायतों का समाधान कैसे किया जा रहा है और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर उठने वाले सवालों का जवाब किस तरह दिया जाएगा। इनका समाधान आधिकारिक आंकड़ों, कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शी जांच के आधार पर ही संभव है।

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