
मशहूर ब्रिटिश लेखक जेफ्री आर्चर(फोटो-IANS)
Jeffrey Archer: दुनियाभर में मशहूर ब्रिटिश लेखक जेफ्री आर्चर का निधन सोमवार को हो गया। वह 86 साल के थे। आर्चर ने कई बेस्टसेलर किताबें लिखी हैं। जिनमें 1979 में आई Kane and Abel, 2026 में आई Adam and Eve सहित कई किताबें शामिल हैं। लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंता किताबों की पायरेसी थी। आपको बता दें कि ब्रिटिश लेखक जेफ्री आर्चर का भारत से रिश्ता कुछ अलग ही था। उनकी किताबें यहां सिर्फ खूब बिकती नहीं थीं, बल्कि कई बार भारत में उनकी रिलीज ब्रिटेन से भी पहले कर दी जाती थी। इसके पीछे कोई खास रणनीति नहीं, बल्कि एक ऐसी समस्या थी जिससे आर्चर लंबे समय तक परेशान रहे, वह थी किताबों की पायरेसी। आर्चर ने 2016 में The Times of India को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि अगर उनकी नई किताब पहले ब्रिटेन में रिलीज होती, तो पाइरेटेड कॉपियां भारत की सड़कों पर आधिकारिक किताबों के पहुंचने से पहले आ जाती थीं। इसलिए उनके पब्लिशर्स ने भारत में किताबें पहले लॉन्च करना शुरू कर दिया था।
जेफ्री आर्चर ने बताया था कि भारत में पाइरेटेड एडिशन इतनी तेजी से बाजार में पहुंचते थे कि आधिकारिक किताबों से पहले ही लोग उन्हें खरीद सकते थे। इसी समस्या से निपटने के लिए उनकी किताबों को भारत में पहले रिलीज किया जाने लगा। उन्होंने बताया था कि उनकी Clifton Chronicles सीरीज की आखिरी किताब This Was a Man भारत में ब्रिटेन से दो दिन पहले पहुंची थी। अमेरिका में इसकी रिलीज ब्रिटेन के दो दिन बाद हुई थी।
आर्चर ने भारत में पायरेसी की रफ्तार को खुद भी महसूस किया था। एक बार मुंबई के ट्रैफिक में उनकी कार रुकी हुई थी। तभी एक छोटा लड़का किताबों का ढेर लेकर उनकी कार की खिड़की के पास आया। लड़के ने पूछा कि क्या उन्हें 'लेटेस्ट जेफ्री आर्चर' चाहिए। आर्चर ने जवाब दिया कि वह खुद ही जेफ्री आर्चर हैं। यह वाक्या उन्होंने बाद के वर्षों में अपने इंटरव्यू में कई बार सुनाया। 2015 में The Spectator के लिए लिखी डायरी में भी उन्होंने इसका जिक्र किया था। उनके मुताबिक, नई बेस्टसेलर किताबें ब्रिटेन से भारत पहुंचती थीं और कुछ ही दिनों में मुंबई की सड़कों पर उनकी सस्ती पाइरेटेड कॉपियां दिखाई देने लगती थीं।
जेफ्री आर्चर की भारत में लोकप्रियता सिर्फ पायरेसी तक सीमित नहीं थी। वह भारत को अपना सबसे बड़ा बाजार बताते थे। उनकी किताबों की बिक्री और यहां होने वाले कार्यक्रमों में जुटने वाली भीड़ से उनकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है। 2016 के एक भारत दौरे के दौरान उन्होंने बताया था कि एक कार्यक्रम में करीब 3,000, दूसरे में 2,100 और तीसरे में 1,700 लोग पहुंचे थे। 2019 के जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में भी उनकी चर्चा सुनने के लिए हजारों लोग पहुंचे थे। आर्चर ने उसकी तुलना एक कॉन्सर्ट से की थी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उनकी पिछली 24 किताबें भारत में नंबर एक पर पहुंची थीं।
आर्चर की भारत में लोकप्रियता का सबसे बड़ा आधार उनकी 1979 में आई किताब Kane and Abel रही। वह कई बार दावा करते थे कि करोड़ों भारतीयों ने इस किताब को पढ़ा है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, आर्चर की किताबें दुनिया भर में 300 मिलियन से अधिक कॉपियां बिक चुकी हैं। उनकी Clifton Chronicles की पहली किताब Only Time Will Tell ने भारत में भी बड़ी सफलता हासिल की थी और कई हफ्तों तक नंबर एक पर रही।
आर्चर भारतीय लेखक आरके नारायण के बड़े प्रशंसक थे। उन्होंने Malgudi Days को टैलेंट का शानदार उदाहरण बताया था और नारायण को अपने पसंदीदा लेखकों में रखने की बात कही थी। भारत और आर्चर का रिश्ता क्रिकेट से भी जुड़ा था। वह भारतीय क्रिकेटरों के फैन थे और देश के क्रिकेट कल्चर को पसंद करते थे।
Updated on:
06 Oct 2026 04:49 pm
Published on:
06 Oct 2026 04:21 pm
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