18 साल की उम्र से हुई शुरुआत
भारत पारेख जब 18 साल के हुए तो उनके ऊपर अचानक परिवार की जिम्मेदारी आ गयी , उन्होंने कॉलेज के बाद बीमा बेचना शुरू कर दिया। लोगों से मिल कर बीमा बेचने का काम करते थे। पहले छह महीनों में पारेख ने छह पॉलिसी बेचीं। अपने पहले वर्ष के अंत में, उन्होंने कमीशन के रूप में लगभग 15,000 रुपये कमाए। उस समय उनके लिए "जीवन बीमा बेचना मुश्किल था। पारेख ने बताया बीमा एजेंटों की अक्सर खराब प्रतिष्ठा होती है, और उन्हें गिद्धों के रूप में माना जाता है, जो ग्राहकों की असुरक्षा का शिकार होते हैं। इनमें से किसी ने भी पारेख को विचलित नहीं किया। इन सालों में वह होशियार होते गए और बहुत कुछ सीखते गए । उन्होंने महसूस किया कि मृतकों को ट्रैक करना जीवित को कॉल करने से बेहतर काम करता है। उनके क्लाइंट में स्ट्रीट वेंडर से लेकर बिजनेसमैन तक शामिल हैं।