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‘TRP से बड़ी है जिंदगी’, मद्रास हाईकोर्ट की मीडिया को सख्त हिदायत, POCSO पीड़ित बच्चों के वीडियो-फोटो प्रसारण पर रोक

मद्रास हाईकोर्ट ने वीरामणि से जुड़े POCSO मामले में पीड़ित बच्चों के वीडियो और तस्वीरों के प्रसारण पर अंतरिम रोक लगाई है। कोर्ट ने मीडिया को ‘मीडिया ट्रायल’ से बचने की हिदायत देते हुए कहा कि टीआरपी से ज्यादा जरूरी पीड़ितों की सुरक्षा और निजता है।
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भारत

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Anurag Animesh

•

Sep 25, 2026

Madras High Court

मद्रास हाईकोर्ट (Image- IANS)

Madras High Court: मद्रास उच्च न्यायालय ने उद्योगपति और 'जेम ग्रेनाइट्स' के मालिक आर. वीरामणि से जुड़े बाल यौन उत्पीड़न मामले में पीड़ित बच्चों के वीडियो और तस्वीरों को प्रसारित करने पर टेलीविजन चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कड़ी फटकार लगाते हुए उनके प्रसारण पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह अंतरिम आदेश न्यायाधीश वी. लक्ष्मीनारायणन ने बाल यौन शोषण से पीड़ित बच्चों के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था 'तुलीर चैरिटेबल ट्रस्ट' की प्रबंध न्यासी विद्या रेड्डी द्वारा दायर एक आपातकालीन याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में कुछ मीडिया हाउस और अन्य अज्ञात सोशल मीडिया खातों से बाल यौन शोषण सामग्री और पीड़ितों की पहचान उजागर करने वाले सभी वीडियो, स्क्रीनशॉट और क्लिप्स को तुरंत हटाने की मांग की गई थी।

अदालत ने दी चेतावनी


मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश ने मीडिया चैनलों को अपराध के प्रति संवेदनशीलता दिखाने और 'मीडिया ट्रायल' से दूर रहने की सख्त हिदायत दी। कोर्ट ने कहा कि हालांकि अदालत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपराध की रिपोर्टिंग के अधिकार का सम्मान करती है, लेकिन जीवन में टीआरपी रेटिंग से बढ़कर भी बहुत कुछ होता है। अदालत ने चेतावनी दी कि पीड़ितों की पहचान उजागर करने से अन्य पीड़ित शिकायत दर्ज कराने और बयान देने के लिए आगे आने से डरेंगे।

एसआइटी मामले की प्रगति से अवगत कराए


मद्रास हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल को निर्देश दिया कि वह जनता को जांच की प्रगति से अवगत कराने के लिए सप्ताह में एक बार प्रेस विज्ञप्ति जारी करे। इसके साथ ही न्यायाधीश लक्ष्मीनारायणन ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सोशल मीडिया से इन वीडियो और तस्वीरों को तुरंत हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाने का आदेश दिया। राज्य के मुख्य अभियोजक आर. जॉन सत्यन ने अदालत को सूचित किया कि सरकार इस मामले की गंभीरता को लेकर अत्यधिक संवेदनशील है और पुलिस वीडियो लीक होने के शुरुआती बिंदु का पता लगा रही है तथा लीक करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने पर भी विचार कर रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि अब तक चार पीड़ितों की पहचान कर उनके बयान दर्ज कर लिए गए हैं तथा एक अन्य पीड़ित भी शिकायत लेकर आगे आया है। पुलिस द्वारा गूगल और मेटा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को वीडियो हटाने के अनुरोध भेजे जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि जांच पूरी तेजी से चल रही है। अदालत ने इंडिया टुडे और रिपब्लिक टीवी सहित सभी प्रतिवादियों को जवाब-हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।