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SIR पर NDA सहयोगी ने भी की चुनाव आयोग से अपील, कहा- जनता में पैदा हो रहा भ्रम

Election Commission: SIR और मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों के बीच NDA सहयोगी उपेंद्र कुशवाह ने चुनाव आयोग से स्थिति जल्द स्पष्ट करने की अपील की है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (फोटो-IANS)

Upendra Kushwaha: भारत चुनाव आयोग (ECI)की निष्पक्षता को लेकर देशभर में उठ रहे सवालों पर अब विपक्ष के साथ-साथ सत्ता दल के लोग भी चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेन्द्र कुशवाह ने शुक्रवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चुनाव आयोग से अपील की है।

उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनता में काफी उलझन पैदा हो गई है। उन्होंने चुनाव आयोग से अविलंब सही स्थिति स्पष्ट करने की अपील की है। वे एनडीए सहयोगी होने के बावजूद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और जनता के भ्रम दूर करने पर जोर दे रहे हैं।

पहले SIR को लेकर अलग था कुशवाह का रुख

एएनआई की पहले की रिपोर्टों के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव के समय जब उपेंद्र कुशवाह से SIR को लेकर सवाल किए गए थे तो उन्होंने विपक्ष के सवालों को खारिज कर दिया था। उन्होंने कांग्रेस की SIR को लेकर की गई रैली पर सवाल उठाते हुए कहा था कि अगर वास्तव में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए होते तो लोग सड़कों पर उतर आते। चुनाव परिणाम के बाद उन्होंने कहा कि SIR कोई मुद्दा नहीं था। उन्होंने विपक्ष के खराब प्रदर्शन को जनता के फैसले से जोड़ते हुए कहा था कि बिहार के लोगों ने उन्हें खारिज कर दिया है।

14 आपत्तियों के बाद बढ़ा विवाद

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष हमलावर हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फैसलों और निर्देशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में नए मतदाताओं के फॉर्म, वोटर डेटा, नाम जोड़ने-हटाने और चुनाव आयोग के डिजिटल सिस्टम से जुड़े मुद्दों का उल्लेख है।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को अंतिम फैसलों में मतभेद मानने से इनकार किया। आयोग का कहना है कि काम के दौरान सवाल, सुझाव और अलग राय सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR समेत उसके अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।

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