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हिंदू मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, दर्शन से पहले देनी होगी देवी-देवता के प्रति श्रद्धा की लिखित गारंटी

मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु के आगमिक हिंदू मंदिरों में प्रवेश से पहले गैर-हिंदुओं को देवी-देवता के प्रति श्रद्धा और मंदिर की परंपराओं का पालन करने का लिखित आश्वासन देना होगा।
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भारत

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Mukul Kumar

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Updated: 27 Oct 2026, 4:57 PM IST

Temple Entry

मिनाक्षी मंदिर। (फाइल फोटो- ANI)

तमिलनाडु के आगमिक हिंदू मंदिरों में प्रवेश को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि इन मंदिरों में गैर-हिंदुओं को प्रवेश से पहले संबंधित देवी-देवता के प्रति अपनी श्रद्धा जाहिर करनी होगी।

साथ ही मंदिर की परंपराओं और नियमों का पालन करने का लिखित भरोसा भी देना होगा। ऐसा नहीं करने वालों को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।

23 अक्टूबर को आया फैसला

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस पी मुरुगन की डिवीजन बेंच ने 23 अक्टूबर को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश आगमिक मंदिरों पर लागू होगा, जहां पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां आगम शास्त्रों में बताए गए नियमों के अनुसार होती हैं।

मंदिर में प्रवेश के लिए देना होगा लिखित आश्वासन

हाईकोर्ट ने कहा कि मंदिरों में प्रवेश करने वाले गैर-हिंदुओं को वहां के मुख्य देवी-देवता के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करनी होगी। इसके लिए मंदिर प्रशासन की ओर से तय प्रारूप में लिखित आश्वासन देना होगा। कोर्ट के मुताबिक, मंदिर की धार्मिक परंपराओं और पवित्रता को बनाए रखना जरूरी है।

यह फैसला थंगम वेंकटेश की याचिका पर सुनवाई के बाद आया। याचिकाकर्ता ने तमिलनाडु मंदिर प्रवेश प्राधिकरण कानून, 1947 और हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती कानून, 1959 के तहत मंदिरों के नियमों को लागू कराने की मांग की थी।

जाति के आधार पर रोक को संविधान के खिलाफ बताया

कोर्ट ने अपने फैसले में एक महत्वपूर्ण बात भी कही। कोर्ट ने कहा कि आगमिक परंपराओं के नाम पर हिंदू समाज की कुछ जातियों को मंदिर में प्रवेश से रोकने वाली पुरानी व्यवस्थाएं अब सही नहीं ठहराई जा सकतीं।

अदालत ने कहा कि संविधान सर्वोपरि है और भेदभाव करने वाली पुरानी धार्मिक मान्यताओं को खत्म करना होगा। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि गैर-हिंदुओं के लिए लिखित आश्वासन से जुड़ी शर्त लागू रहेगी।

मुख्यमंत्री विजय का उदाहरण देकर कही यह बात

फैसले में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय का उदाहरण भी दिया गया। कोर्ट ने कहा कि ईसाई धर्म को मानने वाले मुख्यमंत्री ने मीनाक्षी मंदिर में दर्शन से पहले लिखित आश्वासन दिया था।

अदालत ने कहा कि उनसे हिंदू धर्म अपनाने के लिए नहीं कहा गया था, बल्कि देवी के प्रति श्रद्धा जाहिर करने को कहा गया था। कोर्ट ने इसे सभी को साथ लेकर चलने वाला तरीका बताया।

मंदिरों में नेताओं के प्रवेश पर भी टिप्पणी

हाईकोर्ट ने मंदिरों में कुछ नेताओं के प्रवेश से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि धार्मिक परंपराओं का पालन जरूरी है। अदालत ने मीनाक्षी मंदिर में विधायक बदरुद्दीन मुस्तफा के प्रवेश और तिरुचेंदूर मंदिर में एक ईसाई मंत्री के बिना लिखित आश्वासन प्रवेश करने की घटना का भी उल्लेख किया।

कोर्ट ने तिरुवन्नामलाई के अरुणाचलेश्वर मंदिर से जुड़े एक वीडियो पर भी नाराजगी जताई, जिसमें कुछ लोगों के मंदिर परिसर में आगे बढ़ने और श्रद्धालुओं के विरोध का जिक्र था। अदालत ने कहा कि मंदिर प्रशासन को ऐसे मामलों में मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए।