
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को मिली जमानत (फोटो- X@AskAnshul)
Myanmar Training Camp Case: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने म्यांमार में टेरर ट्रेनिंग कैंप से जुड़े मामले में गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक को डिफ़ॉल्ट जमानत दे दी है। कोर्ट ने 1 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड और उतनी ही रकम की जमानत राशि जमा करने पर उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है।
जमानत देते समय कोर्ट ने कुछ कड़ी शर्तें रखीं। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, रिहाई के बाद मैथ्यू वैनडाइक को दिल्ली के नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में ही रहना होगा और जांच अधिकारी की मंजूरी के बिना इसकी सीमा से बाहर नहीं जा सकते। इसके अलावा, जब भी जांच अधिकारी (IO) या NIA पूछताछ या जांच से जुड़ी कार्रवाई के लिए बुलाएंगे, तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने पेश होना होगा।
कोर्ट में अमेरिकी नागरिक की तरफ से पेश वकील रोहित डंडरियाल ने डिफॉल्ट जमानत की मांग की थी। उन्होंने बताया कि कानूनी तौर पर तय 180 दिन की समय सीमा खत्म होने के बावजूद, NIA अपनी जांच पूरी करने और आरोपी के खिलाफ समय पर चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रही है। ऐसे में कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) के तहत डिफॉल्ट जमानत पाना आरोपी का कानूनी अधिकार बन गया। बचाव पक्ष की इस दलील को मानते हुए कोर्ट ने मैथ्यू वैनडाइक को हिरासत से रिहा करने का आदेश दिया।
म्यांमार से जुड़े इस कथित विदेशी आतंकी ट्रेनिंग मॉड्यूल के सिलसिले में कुल सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले की सुनवाई के दौरान स्पेशल कोर्ट ने साफ किया कि इसी केस में गिरफ्तार किए गए बाकी छह यूक्रेनी नागरिक भी इसी तरह के कानूनी आधार पर डिफॉल्ट जमानत के हकदार हैं, बशर्ते वे कोर्ट में अपनी जमानत अर्जी दाखिल करें।
NIA ने हाल ही में इस मामले में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जिसमें गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोप शामिल नहीं किए गए। इसके बजाय इमिग्रेशन एक्ट और फॉरेनर्स एक्ट के तहत आरोप लगाए गए। हालांकि, NIA ने पहले कहा था कि UAPA से जुड़े आरोपों की जांच चल रही है। एजेंसी ने यह भी संकेत दिया था कि अगर जांच के दौरान UAPA के तहत अपराध सामने आते हैं, तो बाद में एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा सकती है।
NIA ने मार्च 2026 में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में म्यांमार के जातीय सशस्त्र समूहों से संबंध, ड्रोन युद्ध की ट्रेनिंग और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आरोप शामिल हैं। जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने म्यांमार में कुछ हथियारबंद ग्रुप्स से संपर्क किया और उन्हें ट्रेनिंग और दूसरी तरह की मदद दी। NIA इन आरोपों की जांच कर रही है। आरोपियों के खिलाफ आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के दौरान लिया जाएगा।
Updated on:
18 Sep 2026, 3:42 PM IST
Published on:
18 Sep 2026, 3:42 PM IST
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