
ऋतब्रत बनर्जी (फोटो- IANS)
Nandigram Bypoll 2026: पश्चिम बंगाल की हाई प्रोफाइल नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे द्वारा अपना नामांकन वापस लेने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता और डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नंदीग्राम से उम्मीदवार का नाम वापस लेना कोई राजनीतिक रणनीति नहीं है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के साथ कोई सेटिंग है।
ममता बनर्जी द्वारा नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन दिए जाने के फैसले पर ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पिछले सात दिनों से ममता बनर्जी कांग्रेस के साथ पर्दे के पीछे चुनावी समझौता करने की कोशिश कर रही थीं। उनकी योजना रेजीनगर सीट से खुद चुनाव लड़ने और नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने की थी। जब कांग्रेस ने इस एकतरफा प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो वह इतनी नाराज हो गईं कि उन्होंने यह तक कह दिया कि वह अब संसद में कांग्रेस के साथ नहीं बैठेंगी। अब मजबूरी में उम्मीदवार का नामांकन वापस करवाकर वे कांग्रेस प्रत्याशी को बेहतर बता रही हैं।
पार्टी फंड के दुरुपयोग को लेकर आरोप लगाते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस किसी की प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है, जहां पार्टी का फंड आसानी से निकालकर भतीजे की निजी कंपनियों में ट्रांसफर किया जा सके। ऋतब्रत ने दावा किया कि पार्टी के हजारों करोड़ रुपये का इस्तेमाल परिवार के निजी हितों के लिए किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि मदन मित्रा जब उनके साथ नहीं थे, तब उन्हें भी विरोधी खेमे तक संदेश पहुंचाने के लिए जरिया बनाया गया था कि भतीजे के लिए किसी भी तरह कानूनी राहत का रास्ता तैयार किया जाए।
बागी नेताओं पर ममता गुट के आरोपों का जवाब देते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि अभी उनके साथ जो 90 प्रतिशत नेता हैं, वे ममता सरकार में मंत्री रह चुके हैं। अगर ये सभी लोग भ्रष्ट थे, तो सत्ता में रहने के दौरान उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक या कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
ऋतब्रत ने कहा कि ममता बनर्टी का गुट अभी बहुत हताशा में है और चुनाव आयोग तथा न्यायिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाना इसी घबराहट को दिखाता है। ऋतब्रत ने कहा कि उनका गुट जनता के बीच चुनावी मैदान में मजबूती से डटा हुआ है, जबकि ममता बनर्जी का खेमा सिर्फ पर्दे के पीछे सौदेबाजी में लगा हुआ है।
Updated on:
18 Sept 2026 08:11 pm
Published on:
18 Sept 2026 08:11 pm
